श्रीराम जानकी मंदिर में बीते छह दिनों से चल रही
श्रीमद् भागवत कथा में शुक्रवार को कथा व्यास ने कई प्रसंगों को सुनाकर भाव
विभोर कर दिया। उन्होंने महारास के अर्थ को समझाते हुए रुक्मिणी-कृष्ण
विवाहोत्सव की महिमा का भी बखान किया।
श्रीमद्भागवत कथा सुनाने जबलपुर
से आए आचार्य डा. सत्येंद्र स्वरूप शास्त्री ने कहा कि कृष्ण को योगेश्वर
कहा जाता है। रसोत्सव के महत्व को बताते हुए उन्होंने मथुरा गमन की लीला का
प्रसंग सुनाया। इस दौरान कंस उद्धार की लीला और भगवान के द्वारिका गमन की
कथा भी सुनाई।
द्वारिका गमन, माता-पिता को बंधन मुक्त कराना और रुक्मिणी
मंगल की कथा सुनाई। मुख्य यजमान राजीव मिश्र, डा. अरुण मिश्र एवं शिव शंकर
मिश्र ने परिवार विवाहोत्सव को धूमधाम से मनाया। रुक्मिणी एवं कृष्ण के
विवाह की झांकियों को भी पेश किया गया। इस दौरान मुकेश बाजपेयी, डा. राजीव
सिंह, विवेक सिंह, धीरेंद्र सिंह तथा अनुराग आदि मौजूद थे।