जिले के 1177 परिषदीय विद्यालयों में बने 2335 शौचालय
बदहाल स्थिति में हैं। इनमें से अधिकांश में न तो दरवाजे हैं और न ही सीट
आदि लगी हुई है। जिसके चलते इन विद्यालयों के बच्चों को दिक्कतों का सामना
करना पड़ रहा है। इसकी जानकारी होने पर परियोजना निदेशक ने नजरें टेढ़ी
करते हुए विद्यालयों मेें शत प्रतिशत शौचालय दुरुस्त करने के आदेश विभागीय
जिम्मेदारों को दिए हैं।
परिषदीय विद्यालयों में सर्व शिक्षा अभियान
और पंचायती राज विभाग की ओर से शौचालयों का निर्माण कराया गया है। भारत
स्वच्छता मिशन के तहत हर स्कूल में बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग
शौचालयों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
ज्ञात हो कि परिषदीय
विद्यालयों में 70 हजार की लागत से विद्यालय बनवाए गए थे। जिले में वर्तमान
शिक्षा सत्र में जिले में कुल 3858 विद्यालय संचालित है। इन विद्यालयों
में करीब 4.95 लाख विद्यार्थियों में करीब 2.49 लाख बालिकाएं व 2.46 लाख
बालक शामिल हैं।
विभागीय आंकड़ों की मानें तो सभी विद्यालयों में बालक व
बालिकाओं के लिए शौचालयों की व्यवस्था है, पर हकीकत यह है कि इनमें से
अधिकांश विद्यालयों में शौचालय बदहाल स्थिति में हैं। विभागीय जानकारी
के अनुसार, 1177 विद्यालयों में बालक वर्ग के 886 प्राइमरी व 272 जूनियर
विद्यालय के शौचालय हैं, जबकि बालिका वर्ग में 897 प्राइमरी व 270 जूनियर
विद्यालय के शौचालय मिलाकर 2335 शौचालय प्रयोग लायक ही नहीं है।
भारत
स्वच्छता मिशन के तहत इसी वर्ष 30 जून तक सभी विद्यालयों में बालक और
बालिकाओं के लिए शौचालय दुरुस्त करने का फरमान केंद्र सरकार की ओर से जारी
हुआ है। इसकी भनक लगते ही महकमे में खलबली मच र्गई।
उधर, परिषदीय स्कूलों
में भारत स्वच्छता मिशन के तहत शौचालयाें का निर्माण करा दिया गया है और
सभी शौचालय क्रियाशील है। इसका प्रमाण पत्र विभाग को देना होगा। इसके बाद
राज्य परियोजना टीम और भारत सरकार की टीम विद्यालयों का भ्रमण करेगी,
जिसमें यदि विद्यालयों शौचालय दुरुस्त न पाए गए तो संबंधित जिम्मेदारों के
विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।