हरदोई/पिहानी। ईद सात जुलाई को मनाई जाएगी। इसे लेकर बुधवार की देर रात तक तैयारियाें का दौर चला। पूरी रात बाजार आबाद रहे। पूरे माह रोजा रखने वाले बंदों के लिए यह दिन अल्लाह की तरफ से इनाम है। रोजेदारों के लिए जो तीन बड़ी खुशियां हैं, उनमें एक ईद भी है। कहा जाता है कि इस दिन अल्लाह अपने रोजेदार बंदों के मगफिरत फरमाता है।
ईदुल फितर का पर्व हमदर्दी और एक दूसरे की खबरगीरी करते हुए एक साथ खुशियां मनाने का पैगाम देती है। सदकतुल फितर इसी पैगाम को आम करता है। गरीबों की इमदाद दें, जिससे गरीब भी खुशियां मना सकें। नबी हुजूर मोहम्मद साहब ने भी यही तालीम दी और इसके अमली नमूने पेश फरमाए थे। आप (सल्ल.) ने ईदुल फितर के दिन रोते हुए एक अनाथ बच्चे के सर पर दस्ते शफकत रखा और उसे तैयार कर ईदगाह ले गए थे। कहा जाता है कि इस दिन अल्लाह रोजेदारों को बख्शीश देता है और वह गुनाहों से पाक साफ होकर ईदगाह से वापस लौटते हैं। इस ईद की तैयारियों को लेकर मुस्लिम देर रात तक तैयारियों में लगे रहे। ईदगाह और मस्जिदों की साफ सफाई की गई। बाजारों में सजी ईद के खास पकवानों की दुकानें भीड़भाड़ से घिरी रहीं।
नमाजे ईद से पहले अदा करें सदकतुल फितर
पिहानी। सदकतुल फितर शरई हैसियत रखने वाले हर मुस्लिम पर वाजिब है। यह ईदुल फितर के दिन वाजिब होता है। सदकतुल फितर गरीबों में पौने दो किलो गेहूं या इसकी कीमत गरीबों को देने से अदा होता है। पौने दो किलो गेहूं की कीमत 32 रुपये होती है। इस लिए प्रति व्यक्ति 32 रुपये राहे खुदा में दान करने से सदकतुल फितर अदा हो जाएगा। ईद के दिन सूरज निकलने से पहले पैदा होने वाले बच्चे पर भी सदकतुल फितर वाजिब होगा। यानी वालिदैन उसकी तरफ से भी सदका दें।