भीषण गर्मी से सोमवार को लोगों को राहत मिली। बीती
रात से ही आसमान में छाए बादलों से रिमझिम बारिश शुरू हुई और सारे दिन
बूंदाबांदी होती रही। इसके चलते जहां तापमान में गिरावट आई, वहीं लोगों को
उमस भरी गर्मी से राहत मिली। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान खरीफ फसल की बुआई
की तैयारी करने लगे।
दिनभर रुक-रुक कर बूंदाबांदी और बारिश की फुहारें
लोगों के तन मन को भिगोते हुए तपिश से राहत दी, पर खेती किसानी के लिहाज
से अपेक्षानुसार बरसात न हो सकी। इस बाबत मौसम वेधशाला के प्रभारी जयशंकर
मिश्रा ने बताया कि करीब 15 मिमी बारिश हुई है।
पिछले 15 दिनों से झमाझम
बारिश की राह तक रहे लोगों को सोमवार की सुबह आए बादलों ने निराश तो नहीं
किया, मगर जिस तरह बादल गरज रहे थे, उस तरह से बरस नहीं पाए। हालांकि, काले
बादलों को घिरता देख लोग पहले से ही कयास लगाने लगे थे कि आज यह निराश
नहीं करेंगे और निराशा आशा में बदली जब काले बादलों ने जब बरसना शुरू किया,
पर झमाझम की उम्मीदें पूरी न हो सकीं।
यह अलग बात है कि इस हल्की बरसात
से भी शहर के कुछ स्थानों पर चोक पड़े नालों एवं सड़कों के खुदे पड़े
फुटपाथों से जलभराव हो गया, जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
लखनऊ रोड स्थित बाबू सिंह वाली गली में बंद पड़े नालों से बारिश का पानी भर
गया।
दूर से देखने पर गली खुद नाला बनती नजर आई। ऐसे में लोगों को घरों
में ही रुकना पड़ा। काफी देर तक पानी भरा रहा। उधर, नुमाइश चौराहा के आसपास
की सड़कों पर खुदे पड़े फुटपाथों एवं नालों में बनी रुकावट ने एक बार फिर
से यहां जलभराव की स्थिति कर दी।
जलभराव में ही जहां ठेले पर खाना बनाने
वाले अपनी दुकानें लगाने को परेशान नजर आए तो वहीं पटरी दुकानदार भी रोजी
रोटी को लेकर हलाकान रहे। फुटपाथों एवं आसपास की दुकानों के बीच ऊंचाई
यहां लंबे समय से जलभराव का कारण है।
ऊपर से सड़कों एवं फुटपाथों के
निर्माण कार्य में हो रही जल निकासी की अनदेखी जलभराव की समस्या को बढ़ा
देती है। उधर, कचहरी में भी बारिश का असर दिखा। यहां हवाओं एवं हल्की बारिश
के बीच जहां एक अधिवक्ता के तख्त के पास छोटा सा पेेड़ पलट गया, वहीं कई
तख्तों के पास पानी भर गया।
जलभराव को लेकर कचहरी में भी कुछ स्थानों पर
लोग परेशान हुए। उधर, मानसून के दस्तक देने के बाद पहली बार हुई 15 मिमी
बारिश धान आदि की फसलों के लिए पर्याप्त पानी तो न दे सकी, पर पौध रोपाई,
सब्जियों आदि के लिए इस बरसात को आक्सीजन देने वाला माना जा रहा है।
डीडी
कृषि बृजेश चंद्रा ने कहा कि भले ही भरपूर बारिश न होने से निराशा है, मगर
इस बारिश ने खेती किसानी को आक्सीजन देने का काम किया है। अगले दो चार
दिनों में भरपूर बारिश की उम्मीदें लगी हुई है।