फोटो-03- मेडिकल कॉलेज के पर्चा काउंटर पर लगी मरीजों की लाइन। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक करने के लिए लागू की गई आभा आईडी की व्यवस्था मरीजों के लिए जी का जंजाल बन गई है। प्रशासनिक दावों में नई व्यवस्था से ओपीडी पंजीकरण में तेजी की बात कही जा रही है लेकिन धरातल पर स्थिति उलटी है। शनिवार को पंजीकरण खिड़की पर सुबह आठ से ही मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी जो दोपहर तक कम होने का नाम नहीं ले रही थी।
मेडिकल कॉलेज में अब ओपीडी पर्चा बनवाने से पहले मरीज की आभा आईडी अनिवार्य कर दी गई है। जिन मरीजों की आईडी पहले से नहीं बनी है उनका डाटा पोर्टल पर फीड करने में काफी समय लग रहा है। बीच-बीच में सर्वर की धीमी रफ्तार ने कोढ़ में खाज का काम किया। तीमारदारों का कहना है कि एक पर्चा बनने में 10 से 15 मिनट का समय लग रहा है जिससे लाइनें लंबी होती जा रही हैं। गर्मी और उमस के बीच घंटों लाइन में खड़े मरीजों और उनके तीमारदारों का सब्र भी जवाब दे रहा है। कई बुजुर्ग और गंभीर मरीज जमीन पर ही बैठने को मजबूर दिखे। ऐसे में मरीजों को पर्चा बनवाने से लेकर ओपीडी में परामर्श लेने के बाद फार्मेसी से दवा लेने में कम से कम से ढाई घंटे का समय लग रहा है। इससे लोगों को दिक्कतें आ रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को हो रही परेशानी
मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। इनमें से ज्यादातर के पास न तो स्मार्टफोन है और न ही उन्हें डिजिटल प्रक्रिया की कोई समझ है। ओपीडी में दिखाने के लिए पंजीकरण कराने के लिए लंबी कतारों में खड़े मरीजों का कहना है कि पहले ही बीमारी से हाल बेहाल है, ऊपर से अब पर्चा बनवाना सिरदर्द बन गया है। तमाम मरीजों के आधार कार्ड न होने के कारण उन्हें वापस भी लौटना पड़ जाता है।
रिकॉर्ड रखना है ऑनलाइन
आभा आईडी बनाने का मुख्य उद्देश्य मरीजों का रिकॉर्ड ऑनलाइन रखना है ताकि डॉक्टर को मरीज का पुराना इलाज और दवाइयां आसानी से उपलब्ध हो सकें। इस कदम से डॉक्टरों को इलाज में मदद मिलेगी। पंजीकरण काउंटर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रबंधन की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि वह पर्चा बनाते समय मरीज की आभा आईडी उसमें जरूर लिखें।
नई व्यवस्था को अपनाने में थोड़ी दिक्कत आ रही है। स्टाफ को सॉफ्टवेयर की पूरी जानकारी दी गई है ताकि काम तेज हो सके। मरीजों की आभा आईडी बनाना जरूरी है। क्योंकि भविष्य में इसके बिना पर्चा नहीं बन पाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य