हरदोई। शिक्षकों की भर्ती के मामले में हुआ फर्जीवाडा बड़ी साजिश की ओर संकेत कर रहा है। बर्खास्त हो चुके 66 शिक्षकों के मामले में कार्रवाई को लेकर खेल हो रहा है। 18 माह के वेतन की रिकवरी का मामला ठंडे बस्ते में है। उधर, फर्जीवाडे़ के लिए इनके खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई को लेकर विभाग के हाथ खाली हैं। शैक्षिक प्रमाणपत्रों आदि की फाइलें भी नहीं मिली हैं।
फाइलें न मिलने को लेकर तत्कालीन पटल सहायक का चार्ज न दिए जाने की बात सामने आने पर वह कार्रवाई के निशाने पर हैं। पूरे फर्जीवाड़े में काउंसलिंग से लेकर नियुक्ति एवं सत्यापन के बाद 18 माह तक वेतन जारी होते रहना तमाम विभागीय जिम्मेदारों को सवालों के घेरे में लिए हुए है।
ज्ञात हो कि 10 हजार भर्ती योजना में अगस्त 2014 में 356 शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। इनमें से 66 शिक्षकों को फरवरी 2016 में फर्जीवाड़े के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। इन सभी पर आरोप था कि फर्जी टीईटी अंक पत्र लगाकर नौकरी हासिल की। सवाल उठता है कि काउंसलिंग से लेकर सत्यापन तक मामला पकड़ में क्यों नहीं आया जिसके चलते करीब 18 माह तक वेतन जारी होता रहा। यदि सत्यापन संदिग्ध था या फिर अपूर्ण था तो किसके आदेश पर वेतन जारी किया जाता रहा।
फाइलें मिलते ही होगी कार्रवाई - बीएसए
बर्खास्त शिक्षकों के मामले में वेतन रिकवरी एवं एफआईआर की कार्रवाई को लेकर बीएसए डॉ. मसीहज्जुमा सिद्दीकी ने कहा कि तत्कालीन पटल सहायक पर कार्रवाई की चेतावनी पत्र जारी किया गया है। फाइलें मिलते ही कार्रवाई कर दी जाएगी।
शाहाबाद क्षेत्र के लिपिक को निलंबन की चेतावनी
बीएसए डा. मसीहज्जुमा सिद्दीकी ने विकास खंड शाहाबाद का लिपिकीय प्रभार न देने वाले तत्कालीन लिपिक सुधीर कुमार मिश्रा को निलंबित करने की चेतावनी दी है। 20 जून तक चार्ज लिपिक मधुर पाल को हस्तगत करने का आदेश दिया है। बीएसए ने अपने आदेश पत्र में कहा है कि 17 जून तक चार्ज हस्तगत कराने के आदेश देते हुए चार्ज न देने पर निलंबित करने की चेतावनी दी गई थी मगर चार्ज नहीं दिया। एक बार फिर से आदेशित किया जाता है कि 20 जून तक चार्ज हस्तगत कर दें अन्यथा 21 जून को निलंबित किया जाएगा।