हरदोई। महात्मा गांधी जनकल्याण समिति की ओर से गुरुवार को गांधी भवन में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू हरी बहादुर श्रीवास्तव की स्मृति में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम में सेनानियों के बलिदान को याद किया। वक्ताओं ने गांधी जी के जीवन के आदर्शों को आत्मसात करने की बात कही।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भोला सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। उन्होंने कहा कि गांधी जी के प्रयोग प्रासंगिक और सार्थक हैं, उनका आदर्श जीवन और जीवनशैली को भारत में ही नहीं विदेशों में भी मान्यता प्रदान की गई है। डा. सावित्री शुक्ला ने कहा कि गोष्ठी में दिए गए विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सादगी, अपरिग्रह और सर्वधर्म संभाव के उनके प्रयोगों और उनकी सामाजिक अवधारणा की तकनीकी आत्म परीक्षण की थी।
सर्वोदय आश्रम अध्यक्ष उर्मिला श्रीवास्तव ने कहा कि गांधी जी ने प्रयोगों के माध्यम से परंपराओं को स्थापित किया। प्रोफेसर डा. संदीप सिन्हा ने कहा कि गांधी जी के प्रयोगों में स्वच्छता, पर्यावरण, स्वतंत्रता और शक्ति के विकेंद्रीकरण के सिद्धांत मौजूद थे। जीडीसी के डा. तारकेश्वर गुप्ता ने कहा कि गांधी जी ने निशुल्क शिक्षा और मातृभाषा में शिक्षा देने और उसके माध्यम से व्यक्ति को स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया है। कार्यक्रम संचालक अखिलेश बाजपेयी ने कहा कि अतिथियों का आभार प्रकट किया।
इस मौके पर रामप्रकाश शुक्ला, धर्मेंद्र सिंह, डा. निर्मला यादव, डा. बीडी शुक्ला, अरुणेश बाजपेयी, करुणा शंकर दीक्षित, विजय भाई, एसएस अगिभनहोत्री, नरेश गोयल, केके यादव, शिशु पाल सिंह, केएम अवस्थी, कुसुम जौहरी, जोगिंदर सिंह गांधी, मनमन शुक्ला और रंजना सिंह मौजूद रहीं।