बेमौसम हुई बारिश और ओलावृष्टि एक किसान के परिवार पर
आफत बनकर टूटी। बेटी के हाथ पीले करने की हसरत लिए किसान बोई गई गेहूं की
फसल पर पूरी तरह से आश्रित था, पर कुदरत की मार के आगे किसान की पूरी फसल
बर्बाद हो गई और जब वह खेत पर फसल देखने पहुंचा तो फसल की तबाही देखकर उसको
हार्टअटैक पड़ गया, जिससे उसकी खेत पर ही मौत हो गई।
उधर, प्रशासन किसान
की मौत को बीमारी से हुई मौत बता रहा है। मिली जानकारी के अनुसार,
कोतवाली क्षेत्र के बरौना गांव के मजरा सुत्तापुरवासी निवासी किसान
रामेश्वर (50) पुत्र दूलम के पास अपना और अपने परिवार का जीवन यापन करने के
लिए मात्र एक बीघा जमीन थी, जिस पर उसने गेहूं की फसल उगाई थी।
इधर बीते
दिनों बेमौसम हुई बारिश और ओलावृष्टि से उसकी भी फसल पूरी तरह से पलट कर
बर्बाद हो गई। रामेश्वर के ऊपर किसान क्रेडिट कार्ड का बीस हजार रुपये का
कर्जा भी था। बीते दिन रामेश्वर खेत पर अपनी फसल देखने गए थे। इस दौरान
उन्होंने जैसे ही अपनी पलटी और बर्बाद हुई गेहूं की फसल देखी तो उनका काफी
सदमा लगा और वहीं पर बेहोश हो गए, जिससे उनकी खेत पर ही मौत हो गई।
बताया
जाता है कि सदमा लगने से हुए हार्ट अटैक पड़ा था। उनकी मौत की जानकारी
जैसे ही परिजनों को लगी तो कोहराम मच गया और बाद में परिजनों ने उनका अंतिम
संस्कार कर दिया। इस बाबत परिजनों ने बताया कि मृतक की एक पुत्री जीएनएम
की ट्रेनिंग कर रही है और उसकी शादी करने के लिए रामेश्वर काफी भागदौड़ कर
रहे थे, पर फसल की बर्बादी ने उनको ही उठा लिया।
ग्राम प्रधान छुन्नी लाल
ने सदमे से किसान की हुई मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि खेत पर जाने के
दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। इस दौरान आसपास मौजूद लोगों
ने इसकी सूचना परिजनों को दी तो परिजन उनको लेकर अस्पताल ले गए, पर तब तक
उनकी मौत हो चुकी थी।
लेखपाल व पुलिस को मामले की जानकारी दी गई,
पर किसी के मौके पर न पहुंचने से उनका अंतिम संस्कार परिजनों ने कर दिया। उधर,
तहसीलदार रामचंद्र यादव ने बताया कि रामेश्वर को बुखार आ रहा था। उसकी
बीमारी के चलते मौत हुई है। इस मामले की जांच करा ली गई है। उधर, एसडीएम
पीपी तिवारी ने भी किसान की बीमारी के चलते मौत होने की बात कही है।