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ोल कड़ाकड़ सीताराम के उद्घोष के साथ हर्रैया पहुंचा रामादल

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फोटो-23- परिक्रमा यात्रा में शामिल मेला क मेटी के अध्यक्ष महंत भारत दास का रथ। संवाद - फोटो : HARDOI
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भरावन। बोल कड़ाकड़ सीताराम ... के उद्घोष के साथ सोमवार की अल सुबह 84 कोसीय परिक्रमा यात्रा व रामादल ने जिले में प्रवेश किया। सीतापुर बार्डर पर गोमती नदी के पास गेट पर अधिकारियों ने यात्रा पर फूल बरसाकर स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने ग्राम हर्रैया व उसके आस पास लगभग पांच किलोमीटर दायरे में डेरा डाल दिया।
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नैमिषारण्य की पावन भूमि से रविवार को शुरू हुई पौराणिक 84 कोसीय परिक्रमा यात्रा रविवार की रात सीतापुर के कुरौना गांव में विश्राम करने के बाद सोमवार की अल सुबह जनपद के पहले पड़ाव स्थल ग्राम हर्रैया पहुंची। इससे पूर्व हरदोई सीतापुर की सीमा पर गोमती नदी पुल के पास बनाए गए स्वागत द्वार पर पहले से मौजूद रहे सीओ संडीला उमाशंकर उत्तम, नायब तहसीलदार भीम चंद्र व थाना प्रभारी अतरौली सोनू राजौरा ने मेला अध्यक्ष भरत दास का माल्यार्पण किया और रामादल पर फूल बरसा कर स्वागत किया।
यहां से बोल कड़ाकड़ सीताराम आदि के उद्घोष करते हुए परिक्रमार्थी हर्रैया पड़ाव स्थल पर पहुंचे। इधर यात्रा के पड़ाव स्थल पहुंचने पर हर्रैया, कल्याणमल, बड़सरा, जनिगांव व सोनिकपुर आदि के ग्रामीणों ने भी परिक्रमार्थियों का स्वागत किया। इस दौरान प्रशासन की ओर से जगह-जगह हेल्प काउंटर व मेडिकल काउंटर खुलवाए गए। जिन पर पहुंच कर परिक्रमार्थियों ने आवश्यकता की चीजें व दवाएं आदि लीं। अध्यक्ष महंत भारत दास ने बताया कि इस बार यात्रा में लगभग पांच लाख श्रद्धालु शामिल हुए हैं।
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आकर्षण का केंद्र रहा भरतदास का रथ
पहले आश्रम के संत व परिक्रमा/मेला अध्यक्ष भरतदास सोमवार को बॉर्डर पुल पर चार घोड़ों व मालाओं से सुसज्जित चार पहिया रथ पर सवार होकर पहुंचे। उनके साथ श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रही। वहीं बाला जी खेतुई के महंत नागेंद्र दास गजराज पर सवार होकर एवं नैमिषारण्य के परखदास बाबा पालकी पर सवार होके यात्रा में शामिल हुए।
राम व कृष्ण ने की थी परिक्रमा, यह है महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम और कृष्ण ने स्वयं आकर नैमिषारण्य की 84 कोसी परिक्रमा की थी। पांडव, मनु व दधीचि भी यहां आए थे। यही नहीं विक्रम संवत के प्रणेता महाराजा विक्रमादित्य ने भी यहां आकर परिक्रमा की थी। वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम ने अपने जीवन का एक वर्ष नैमिष में ही व्यतीत किया था। संतों ने बताया कि एक बार माता पार्वती ने जन कल्याणार्थ तीनों लोक के स्वामी भगवान शिवशंकर से कलियुग में होने वाली तीर्थयात्रा के संबंध में पूछा।
कहा कि कलियुग में प्राणी एक लोक की यात्रा के लिए भी समय नहीं दे सकेगा ऐसे में वह भला तीनों लोकों की यात्रा कैसे करेगा। इस पर भगवान शंकर ने कहा, जो प्राणी कलियुग में नैमिष की 84 कोसीय परिक्रमा करेगा, उसे तीनों लोक की तीर्थ यात्रा का अक्षय फल मिलेगा। बताया कि ऐसा इस लिए है क्योंकि महर्षि दधीचि के शरीर त्यागने से पूर्व उनकी इच्छा को पूर्ण करने के लिए तीनों लोकों के समस्त तीर्थ नैमिष की तपोभूमि में उनके समक्ष विराजमान हुए थे। परिक्रमा से प्राणी को तीनों लोकों के समस्त तीर्थों का मनोवांछित लाभ मिलता है।
परिक्रमा मार्ग में देवी देवताओं का समागम
यात्रा में शामिल संतों ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार नैमिषारण्य में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है। नैमिष से कुरौना तक चक्र तीर्थ, पंचमुखी महादेव, बद्रीनाथ, ओंकार नाथ, भूतेश्वर, पंच प्रयाग, जानकी कुंड, कर्कराज, राम कुंड व द्वारिका धीश विराजमान हैं।
वहीं कुरौना से हर्रैया के बीच त्रेता के शिव, द्वारिका तीर्थ, अरुंधती कूप, अहल्या तीर्थ, यज्ञ बाराह कूप, मलूक बट, आश्रम बनगढ़, कुमनेश्वर, महाश्री तीर्थ, चतुर्भुज, लक्ष्मी कूप, मोहनेश शिव, निकटेश्वर, भवरुंडी, कुरकुरी तीर्थ, कुर्तुमेश्वर, अगवती, कैलाश, खबिश, मानसरोवर, कोटश्विर, धोधाक, अरुकेश्वर व खगपति का वास है। हर्रैया से नगवा पड़ाव के बीच बिरजा तीर्थ, बानेश्वर, भद्रकाली, मोटेनाथ, हत्याहरण, धौत पाप, नर्मदेश्वर, शूली महादेव आद िसमस्त तीर्थ और प्रकृति का चराचर विद्यमान है, जिसके प्रमाण भी मौजूद हैं।
मिट्टी खोद चूल्हा बनाया, सेंकी रोटियां
पड़ाव स्थल पर डेरा डालने के बाद महिला श्रद्धालु भोजन की व्यवस्था करने में व्यस्त नजर आईं। इनके पास अन्य संसाधन नहीं थे, उन महिलाओं ने मिट्टी खोदकर चूल्हा बनाया और उस पर रोटियां सेंकी। पुरुष परिक्रमार्थी पानी व लकड़ियां आदि का इंतजाम करते नजर आए। यात्रा में हरदोई के अलावा, शाहजहांपुर, बरेली, लखनऊ, आगरा, अयोध्या, बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, रायबरेली व फैजाबाद समेत अन्य जिलों व पड़ोसी देश नेपाल, प्रांत हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि के श्रद्धालु शामिल रहे।
जटा व भस्मधारी समेत किन्नर संत भी हुए शामिल
परिक्रमा यात्रा में शामिल अटल दास बाबा की लगभग 15 फीट लंबी जटाएं आकर्षण का केंद्र रहीं। अटल दास ने बताया कि वह 45 वर्षों से निरंतर परिक्रमा कर रहे हैं। यात्रा में शामिल नागा साधुओं ने गोल चक्र बनाकर धूनी रमाई और खुद को भस्म में लपेटे नजर आए।
किन्नर साधु अविराम दास भी अपने अपने साथियों के साथ परिक्रमा में शामिल हुईं और सीताराम की धुन में मस्त दिखीं। इससे इतर नैमिषारण्य के निशक्त बाबा अशोक दास ट्राई साइकिल से परिक्रमा कर रहे हैं। बाबा अशोक दास ने बताया कि वह 15 वर्षों से लगातार परिक्रमा में शामिल हो रहे हैं।

फोटो-24- परिक्रमा यात्रा की अगुआई कर रहे कमेटी के अध्यक्ष व संत महंत भारत दास को माला पहनाकर स्वागत ?- फोटो : HARDOI

फोटो-25- हाथी पर सवार होकर यात्रा में शामिल होते बाला की धाम खेतुई के महंत बाबा नागेंद्र दास। संवाद- फोटो : HARDOI

फोटो-26- परिक्रमा यात्रा में शामिल नैमिषारण्य के परखदास बाबा की पालकी। संवाद- फोटो : HARDOI

फोटो-27- यात्रा में शामिल महंत संतोष दास खाकी। संवाद- फोटो : HARDOI

फोटो-28- यात्रा में शामिल किन्नर संत। संवाद- फोटो : HARDOI

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