फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेल लाइन को आंदोलन का आगाज

Sun, 31 May 2015 12:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
विज्ञापन
विज्ञापन
हरदोई-कानपुर सीधी रेल लाइन के लिए आंदोलन शुरू हो गया है। लोगों का कहना है कि यदि हरदोई को रेलमार्ग के जरिए कानपुर से जोड़ दिया जाए तो व्यापारियों के साथ ही आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। इससे न सिर्फ व्यापार बढ़ेगा, बल्कि हरदोईवासियों को तमाम चीजें सस्ती मिल सकेंगी।
विज्ञापन


लखनऊ-बरेली मुख्य रेलमार्ग पर स्थित हरदोई से कानपुर जाने के लिए सीधी रेलवे लाइन नहीं है। यहां के लोग माधौगंज से बांगरमऊ, शफीपुर, उन्नाव होते हुए कानपुर पहुंचते हैं। ऐसे में हरदोई, सांडी, बिलग्राम से कानपुर जाने वाले लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि हरदोई के तमाम व्यापारी कानपुर से माल लाते हैं।

ऐसे में उन्हें माल खरीदने जाने में अधिक समय और पैसा खर्च करना पड़ता है। इतना ही नहीं दूरी अधिक होने से भाड़ा भी महंगा पड़ता है। बताया जाता है कि आजादी से पहले माधौगंज से बिलग्राम होेते हुए सांडी तक रेलवे लाइन पड़ी थी, पर वर्ष 1945 में अंग्रेजी हुकूमत ने इस रेल लाइन को उखड़वा दिया।
विज्ञापन


उस समय भी इसका विरोध हुआ था। देश आजाद हुआ तो हरदोई को कानपुर से रेल मार्ग से जोड़ने के लिए आंदोलन हुए। यह सियासी मुद्दा भी बना, पर किसी न किसी कारण बात नहीं मिली। पिछले कई चुनावों से हरदोई को कानपुर से जोड़ने का मुद्दा फिर उठने लगा है।

चुनाव में सभी दल इस मुद्दे को हवा देते रहे हैं, पर हकीकत में अभी तक इस मुद्दे पर कोई काम ही नहीं हुआ है। ऐसे में रेल लाओ अभियान संघर्ष समिति एवं भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन ने आम लोगों को साथ लेकर एक बार फिर आंदोलन शुरू किया है।

विकास ख्ंाड के परसपुर निवासी श्याम किशोर द्विवेदी ने बताया कि पहले औहदपुर स्टेशन बना था। ट्रेन भी यहां रुकती थी। क्षेत्र के बाशिंदे यहां से ट्रेन द्वारा कानपुर तक का सफर तय करते थे, पर जब से रेलवे ट्रैक उखड़ा है, किसी ने दोबारा डलवाने की कोशिश नहीं की।

बिलग्राम तहसील क्षेत्र पर नजर दौड़ाई जाए तो माधौगंज व मल्लावां रेलवे लाइन से जुडे़ तो हैं, पर मुख्य ट्रैक पर न होने से एक दो रेलगाड़ियां यहां रूटीन में चलाई जा रही है। ये गाड़ियां कानपुर बालामऊ इलाकों में पड़ने वाले यात्रियों को ही सुविधा दे पाती हैं, जबकि पूरी तहसील आज भी रेलवे की सुविधा से वंचित है।

क्षेत्र के रामस्वरूप व अजीज कुरैशी बताते हैं कि आजादी से पहले क्षेत्र में रेलगाड़ी की आवाज सुनाई देती थी। औहदपुर से वर्ष 1945 में उखाड़ी गई रेलवे लाइन को लेकर अलग अलग चर्चाएं है। कुछ लोेगों का कहना है कि उस वक्त लोहे की कमी को पूरा करने को लाइन उखड़वायी गई थी।

पर क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि आजादी की लड़ाई में सांडी, बिलग्राम और माधौगंज क्रांतिकारियों के गढ़ रहे थे जिसके खौफ से अंग्रेजों ने सांडी बिलग्राम रेल लाइन को उखड़वा लिया था। उध्ार, कानपुर से सांडी होते हुए माधौगंज तक करीब 40 किमी की दूरी है। इसमें सांडी से माधौगंज के बीच आज भी रेलवे की जमीन खाली पड़ी है, वहीं हरदोई से सांडी के बीच रेलवे को जमीन की व्यवस्था कर पटरी बिछानी होगी।

यदि इस रूट पर रेलवे लाइन पड़कर ट्रेन चालू हुई तो क्षेत्र के लोग ट्रेन द्वारा कानपुर का सफर कर सकें गे वहीं कारोबारियों को भी लाभ होगा। अनुमान है कि हरदोई से कानपुर के बीच चलने वाली रोडवेज बसों से प्रतिदिन 1500 से 2000 यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें