परिवहन निगम को हरदोई परिक्षेत्र के अंतर्गत चलने वाली बसों से प्रतिवर्ष
करोड़ों रुपये की आमदनी होती है, जिसमें साल दर साल इजाफा भी हो रहा है।
फिर भी सुविधाओं के नाम पर हरदोई परिक्षेत्र उपेक्षित है। हरदोई परिक्षेत्र
में प्रतिवर्ष 22 से 23 करोड़ की आमदनी होती है, जिसमें अकेले हरदोई
डिपो से तीन से चार करोड़ रुपये का राजस्व प्रतिमाह आ जाता है।
हरदोई
परिक्षेत्र और हरदोई डिपो से अच्छी आमदनी होने के बावजूद बसों को बेहतर
बनाने के कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हरदोई डिपो के बेड़े में शामिल
कई बसों की हालत खराब है। बसों का कंट्रोल पैनल मरम्मत योग्य है, तो
प्राथमिक उपचार और अग्निशमन संयंत्र का भी बस में कोई इंतजाम नहीं है।
विभाग की अनदेखी का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। बसों का समय से
मेंटीनेंस न होने से कई बार बसें बीच रास्ते में ही खड़ी हो जाती हैं,
जिससे यात्रियों को तो बेहाल होना पड़ता है। चालक और परिचालक भी परेशान
होते हैं, पर इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
हालांकि, रोडवेज
प्रशासन ने जल्द ही खस्ताहाल बसों को हटाने का आश्वासन दिया है। उधर,
परिवहन निगम ने हरदोई डिपो समेत गोला, शाहजहांपुर, सीतापुर और लखीमपुर-खीरी
के डिपो को मिलाकर हरदोई परिक्षेत्र बनाया। हरदोई परिक्षेत्र से उक्त
रूटों की बसों के संचालन के साथ ही लखनऊ, कानपुर के अलावा लंबी दूरी में
आगरा, दिल्ली, अजमेर, मथुरा व गौरीफंटा मार्ग पर बसों का संचालन शुरू हुआ।
वहीं लखनऊ व दिल्ली के लिए एयर कंडीशन बसें शुरू हुईं, पर कुछ दिनों बाद
एयर कंडीशन बसों का संचालन जिले से बंद कर दिया गया, वहीं लंबी दूरी की
र्नईं बसें भी अब लापरवाही का शिकार होकर खस्ताहाल हो गईं।