हरदोई। जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर घटाने के लिए सरकारी अस्पतालों में महीने में एक दिन प्राइवेट डॉक्टरों की निशुल्क सेवाएं ली जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर कई डॉक्टर सेवाएं देने को आगे आई हैं। इसमें 90 फीसदी डॉक्टर केवल जिला महिला अस्पताल में ही सेवाएं देने की इच्छुक हैं। जबकि उनकी जरूरत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सीएचसी और पीएचसी में कहीं अधिक है।
स्वास्थ्य विभाग लगातार योजनाएं चलाकर भी जच्चा-बच्चा मृत्यु पर काबू नहीं कर पा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान शुरू किया है। इसके तहत सरकारी अस्पतालों में प्राइवेट डॉक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी।
फिलहाल हर महीने की नौ तारीख को जिला महिला अस्पताल के अलावा सीएचसी और पीएचसी पर प्राइवेट डॉक्टर बैठेेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने देश के प्राइवेट डॉक्टरों खासकर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ व फिजीशियन से सरकारी अस्पतालों में हर महीने की नौ तारीख को सेवा देने की अपील की है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी प्राइवेट डॉक्टरों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। पहले तो डॉक्टरों ने रुचि नहीं दिखाई लेकिन प्रधानमंत्री की अपील के बाद कई डॉक्टर निशुल्क सेवाएं देने को आगे आई हैं। 10 से अधिक डॉक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया है।
इसमें से ज्यादातर डॉक्टर केवल जिला महिला अस्पताल में सेवा देना चाहती हैं। स्वास्थ्य विभाग ज्यादातर डॉक्टरों से सीएचसी, पीएचसी में सेवाएं देेने की अपील कर रहा है। दरअसल जिले की सीएचसी, पीएचसी में डॉक्टरों की खासी कमी है। इससे इन अस्पतालों में मरीजों को समय पर सही सलाह नहीं मिल पाती है। इससे मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। सीएचसी, पीएचसी पहुंचने वाले ज्यादातर गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रलय ने बीती चार नवंबर को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान से संबंधित एक मोबाइल एप (पीएमएसएमए) व वेबसाइट (pmsma.nhp.gov.in) भी लांच की है। एप व वेबसाइट का प्रयोग कोई भी प्राइवेट डॉक्टर इस मोबाइल एप या वेबसाइट के माध्यम से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर माह की नौ तारीख को अपनी निशुल्क सेवाएं देने के लिए अपना पंजीकरण करा सकती हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि निर्देशों का पालन किया जाएगा। सुरक्षित मातृत्व अभियान को पहले ही शुरू किया गया था लेकिन सरकरी चिकित्सकों की कमी से कुछ खास रेस्पांस नहीं दिखा। जिसके बाद अब सभी निजी स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों से अपील की गई है वह अपना स्वैच्छिक योगदान हर माह की नौ तारीख को सरकारी अस्पतालों में दे सकती हैं।