एक तरफ युवा कल्याण विभाग में पीआरडी जवानों को
ड्यूटी के लाले हैं तो दूसरी ओर उनको जब मौका मिला भी है तो उन्हे 10 हजार
रुपये की व्यवस्था करनी पड़ रही, जिससे कइयों को सर्दी में भी पसीना आ रहा
है। बहरहाल पीआरडी जवानों के हाथ खींचने के बाद दूसरों को मौका दिया जा रहा
है।
कुल मिलाकर युवा कल्याण विभाग भी बामुश्किल मशक्कत के बाद 10
जवानों की सूची निदेशालय भेज पा रहा है। जानकारी के मुताबिक जिले में
पीआरडी जवानों की ड्यूटी को लेकर आरोप प्रत्यारोप का क्रम जारी है। पीआरडी
जहां रोस्टर से ड्यूटी मांग रहे हैं, वहीं युवा कल्याण अधिकारी विभाग की
कार्यशैली को पूरी तरह से पारदर्शी बता रहे हैं, पर सच यह भी है कि पीआरडी
जवान ड्यूटी को तरस रहे हैं।
इधर बीच में निदेशालय से लखनऊ सिटी बसों में
परिचालकों के लिए रिक्तियां बताते हुए जिले से 29 जवानों की मांग की गई थी।
जिसमें पहले 10 की सूची मांगी गई थी। नियमों के मुताबिक हर जवान को जमानत
धनराशि के रूप में 10 हजार रुपये पूर्व में ही जमा करने थे।
इसके बाद तो
एक-एक करके कई जवानों ने इस मौके को छोड़ना ही उचित समझा। जिसके बाद युवा
कल्याण विभाग को भी 10 की संख्या पूरी कर और धनराशि एकत्र कर भेजने में
मशक्कत करनी पड़ गई। इस बाबत क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी पीके मिश्रा का
कहना है कि नियम जो हैं, उन्हें पूरा करना ही है।
हर जवान को जमानत राशि
जमा करनी ही है। सूची के साथ जमानत राशि भी वहां भेजी गई है। जिसके बाद 10
जवानों की सूची मुश्किल से ही भेजी गई, शेष 19 भी मांग पर भेज दिए जाएंगे।
उधर, विभाग की माने तो इससे पूर्व भी सिटी बसों में परिचालक के पदों पर 29
जवान बखूबी अपना दायित्व निभा रहे हैं।