फोटो-19- पिहानी की मस्जिद इस्लामगंज में कुरान शरीफ की तिलावत करते रोजेदार। संवाद
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पिहानी। कोरोना संक्रमण से कराहती इंसानियत को इस वबा (महामारी) से निजात की दुआओं के साथ रमजान के दूसरे अशरे में इबादतों का दौर तेज हो गया है। दूसरे अशरे को अशरा-ए-मगफिरत (अर्थात गुनाहों पर माफी का अशरा) कहा जाता है। रोजेदार अपने छोटे बड़े गुनाहों पर शर्मिंदगी के साथ अल्लाह के आगे हाथ फैलाकर मगफिरत की दुआएं भी मांग रहे हैं।
जमीअत उलेमा-ए-हिंद के हरदोई जिलाध्यक्ष कारी ताहिर बेग बताया कि रमजान में दो वक्त ऐसे हैं जिनमें अल्लाह रोजेदार की दुआ को जरूर सुनता है। एक इफ्तार के वक्त की दुआ और दूसरी नमाज-ए-तहज्जुद और सहरी के बीच की दुआ। रोजेदार के मुंह की महक अल्लाह को मुश्क और अम्बर से भी ज्यादा पसंद है।
कहा कि पहले दस दिनों में अल्लाह अपने बंदों पर अपनी खास रमहत का नुजूल करता है। दूसरे अशरे में माफी के तलबगार बंदों को मगफिरत देता है। तीसरे व अंतिम अशरे में गुनाहों पर नादिम और माफी के तलबगार बंदों को जहन्नुम से आजादी का फरमान सुनाता है। गोपामऊ कस्बे की दरगाह दादा मियां के अहाते में स्थित मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुर्रहमान जामई ने बताया कि रमजान में गरीबों की खबरगीरी करने का हुक्म दिया गया।
हमें अपने इफ्तार-सहरी के इंतजाम के साथ साथ गरीब पड़ोसी के इफ्तार और सहरी के इंतजाम के बारे में भी जानकारी करनी चाहिए। रसूल (सल्ल.) की हदीस है कि वह मोमिन नहीं जिसके पड़ोसी भूखा सोए।
इस्लाम ने गरीबों की इमदाद के लिए फितरा और जकात की दो ऐसी व्यवस्थाएं दी हैं, जिनसे हमारा फर्ज-ओ-वाजिब भी अदा हो जाता है और गरीबों की इमदाद भी हो जाती है। कहा कि रोजा रखने के साथ ही जकात और फितरा भी अदा करें। कसरत से कुरान की तिलावत करें। तिलावते कुरान से दिल का जंग दूर होता है।
फोटो-20- मौलाना अब्दुर्रहमान जामई। संवाद- फोटो : HARDOI
फोटो-21- कारी ताहिर बेग। संवाद- फोटो : HARDOI