हरदोई जिले में अरवल थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पतारपुरवा के निकट गंगा नदी में शनिवार रात उतराते मिले तीनों शवों का पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से अंतिम संस्कार कर दिया। अंतिम संस्कार किए जाने की भनक किसी को भी नहीं लगने दी गई।
पुलिस का दावा है कि शव बेहद पुराने थे और सड़ चुके थे। कहीं से बहकर आ गए थे और इनकी पहचान संभव नहीं थी। इसलिए एसडीएम की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। शनिवार रात अरवल थाना क्षेत्र के ग्राम पतारपुरवा के निकट गंगा किनारे गए कुछ लोगों ने एक अधेड़ का शव किनारे पर लगा देखा।
कुछ ही दूरी पर गंगा में एक महिला और एक बालक का भी शव उतरा रहा था। इसकी सूचना ग्रामीणों ने अरवल पुलिस को दी, तो पुलिस मौके पर पहुंची। इसी दौरान गंगा नदी के दूसरी ओर स्थित कन्नौज जनपद के बदनापुर गांव के ग्रामीणों को भी शव मिलने की जानकारी मिली, तो कन्नौज जनपद के नौरंगपुर पुलिस चौकी से भी पुलिस कर्मी मौके पर पहुंच गए।
अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी कपिल देव सिंह भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद रात में तीनों शव निकलवा लिए गए। तड़के ही तीनों शवों का अंतिम संस्कार भी गंगा किनारे कर दिए जाने का दावा पुलिस और प्रशासन ने किया है।
एसपी अजय कुमार ने बताया कि शव काफी पुराने थे और इनकी पहचान कराना असंभव था ऐसे में ग्राम प्रधान, एसडीएम सवायजपुर दीपक वर्मा की मौजूदगी में तीनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उधर दूसरी ओर एसडीएम सवायजपुर दीपक वर्मा ने बताया कि तीनों शव किसी अन्य जिले से बहकर आए थे।
साहब, कपड़े पहनाकर नहीं किया जाता जल प्रवाह
अनौपचारिक बातचीत में पुलिस अफसरों का यह भी कहना था कि संभवत: तीनों का जल प्रवाह हुआ होगा और बहते हुए यहां तक आ गए। अब अहम सवाल यह है कि अगर जलप्रवाह किया भी गया तो तीनों शव बाकायदा कपड़े कैसे पहने हुए थे। हिंदू मान्यताओं के अनुसार कपड़े पहनाकर जलप्रवाह नहीं किया जाता। इससे इतर अगर शव कोरोना संक्रमितों के थे, तो यह और भी बड़ी बात थी, जिसकी जांच तक से परहेज किया गया।