हरदोई महोत्सव में मंगलवार की रात जाने-माने कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओें को खूब गुदगुदाया। प्रख्यात कवियों के साथ ही जिले के ओज कवि वेदवृत बाजपेयी ने भी वीर रस से भरी रचनाओं को सुनाकर लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई।
सीएसएन डिग्री कालेज के परिसर में चल रहा हरदोई महोत्सव अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। महोत्सव के आठवें दिन मंगलवार को देर रात कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ और देशभर के जाने माने विख्यात कवियों ने अपनी रचनाओं से लोेगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कवि सम्मेलन की शुरुआत मुख्य अतिथि जिलाधिकारी रमेश मिश्रा ने दीप प्रज्जवलित करके की। कांसेप्ट के डायरेक्टर नागेंद्र मिश्रा ने स्मृतिचिन्ह देकर उन्हें सम्मानित किया। कार्र्यक्रम में सबसे पहले मंच कानपुर की शिखा ने पंक्तियां पेश कीं ‘मां की दुआओं का आसरा है’। लखीमपुर के फारूख सदल ने पंक्तियां पेश कीं ‘तुम संवरती हुई सैफई हुई, मैं उजड़कर मुजफ्फरनगर हो गया’।
बाराबंकी के गजेंद्र प्रियांशु ने पंक्तियां पेश कीं ‘प्यार के पथ का अनुगमन कीजिए, मानसिक वृत्तियों का दमन कीजिए’। लखीमपुर के रजनीश मिश्र ने कविता पढ़ी-‘वंदेमातरम भारत के जनमन का उद्घोष है। ओज कवि वेदवृत्त बाजपेयी ने पंक्तियां पेश कीं ‘सरहद पर शंका के बादल’। कवि अविनाश ने पंक्तियां पढ़ा-‘मैं पहुंचा जब बदनाम गली’। सीतापुर के कवि जगजीवन ने पंक्तियां पेश कीं ‘गर बाबा खाईं बदाम तो समझऊ कलजुग है’।
हास्य कवि अनिल बौझड़ ने इन पंक्तियों से गुदगुदाया ‘मौज लिए का होवत हैइ, उनके काहू जानै, हमहूं मारै गई हैं तुमहू मारै जाऊ’। मंच का संचालन कवि अरुणेश मिश्र ने किया। अपनी कविताएं भी सुनाईं। कवियों के रचना पाठ के दौरान पंडाल तालियों से गूंजता रहा।