पिहानी को तहसील बनाने की करीब 40 साल पुरानी मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी। वर्ष 2017 में विधायक श्याम प्रकाश की ओर से यह मामला उठाए जाने के बाद तत्कालीन डीएम ने शासन को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा था, लेकिन बात इसके आगे नहीं बढ़ सकी।
लंबे अरसे बाद भी सुनवाई न होने पर क्षेत्र के लोगों में खासी नाराजगी है। उनका कहना है कि क्षेत्र के कुछ गांव ऐसे हैं, जहां के लोगों को 50 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर शाहाबाद व हरदोई तहसील जाना होता। यहां तहसील बनने पर लोगों को इससे निजात मिलेगी।
वर्ष 1980 में पिहानी को तहसील बनाने की लगभग सारी प्रक्रिया राजस्व परिषद ने पूरी कर ली थी, लेकिन अंतिम समय पर पिहानी के स्थान पर सवायजपुर को तहसील दर्जा दिए जाने का फैसला लिया गया। बस, इसके बाद से पिहानी को तहसील बनाए जाने का मामला जहां का तहां अटका हुआ है।
बात क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति की करें तो यहां क्षेत्र के कुछ गांव ऐसे हैं, जिनकी शाहाबाद से दूरी 50 किलोमीटर या उससे अधिक है। ऐसे में लोगों को तहसील जाने के लिए अपना पूरा दिन खराब करना पड़ता है। छोटे छोटे काम के लिए तहसील जाने पर समय का नुकसान होना लोगों का खासा अखरता है।
वर्ष 2017 में सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद विधायक श्याम प्रकाश ने जनपद में आए उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के सामने यह मामला प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद तत्कालीन डीएम शुभ्रा सक्सेना के निर्देश पर जिला प्रशासन ने सर्वे उपरांत जनपद के पिहानी कस्बे व मल्लावां में तहसील बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन भेजा था।
प्रस्ताव के साथ ही जिला प्रशासन की ओर से विकसित किए जाने वाले परगना व लेखपाल क्षेत्र के मानचित्र भी शासन को भेजे गए थे। प्रस्ताव भेजे हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका है।