फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फिर अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हुई कुर्सी

विज्ञापन
जिला पंचायत परिसर में लहराता तिरंगा। संवाद - फोटो : HARDOI
विज्ञापन
हरदोई। जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित हो गया है। बीस वर्ष बाद एक बार फिर अनुसूचित जाति की महिला जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होगी। इससे पहले वर्ष 1995 में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित था।
विज्ञापन

शुक्रवार को शासन ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद की आरक्षण सूची जारी की। इसके साथ ही कई माह से आरक्षण को लेकर लग रहीं अटकलों पर भी विराम लग गया। सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष पद को अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
25 वर्ष में दूसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनुसचित जाति की महिला के लिए आरक्षित हुआ है। वर्ष 1995 में यह पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित हुआ था और तब राजेश्वरी देवी को जिला पंचायत अध्यक्ष चुना गया था। हालांकि बाद में उनकी ही ननद अनीता वर्मा ने अविश्वास प्रस्ताव के जरिये कुर्सी हथिया ली थी। बहरहाल आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब विभिन्न राजनीति दलों ने नए सिरे से रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
विज्ञापन

लगातार तीसरी बार महिला होगी जिला पंचायत अध्यक्ष
जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित होने के साथ ही एक नया रिकार्ड भी बनना तय हो गया है। लगातार तीसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर महिला ही काबिज होगी।
वर्ष 2010 में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित था। तब कामिनी अग्रवाल को जिला पंचायत अध्यक्ष चुना गया था। वर्ष 2015 में यह पद पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हो गया था और तब भी अग्रवाल परिवार की करीबी रिश्तेदार मीरा अग्रवाल को अध्यक्ष चुना गया था। अब एक बार फिर अनुसूचित जाति की महिला के लिए पद आरक्षित हुआ है।
...तो इस बार बादशाहत कायम रखना चुनौती
दो दशक यानी बीस वर्ष से जिला पंचायत की बागडोर परोक्ष या अपरोक्ष रूप से मुकेश अग्रवाल के हाथ में ही रही है। वर्ष 2000 से 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद सामान्य होने पर मुकेश अग्रवाल अध्यक्ष चुने गए।
वर्ष 2010 में यह पद महिला के लिए आरक्षित होने पर मुकेश अग्रवाल की पत्नी कामिनी अग्रवाल जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं। वर्ष 2015 में पिछड़ा वर्ग महिला के लिए पद आरक्षित होने पर भी मुकेश अग्रवाल की करीबी रिश्तेदार मीरा अग्रवाल का निर्विरोध निर्वाचन हुआ था। अब जो हालात बने हैं, उसमें मुकेश अग्रवाल की बादशाहत कायम रहना बेहद मुश्किल है।
...और इन नामों की चर्चा हुई तेज
जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित होने की घोषणा होने के बाद ही कई नाम चर्चाओं में आ गए हैं। मिश्रिख से वर्ष 2014 में भाजपा के टिकट पर सांसद चुनी गईं अंजूबाला को वर्ष 2019 में हुए चुनाव में भाजपा ने टिकट नहीं दिया था। ऐसे में अब अंजूबाला का नाम बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।
इससे इतर सांडी विधायक प्रभाष कुमार की पत्नी निरमा देवी का नाम भी तेजी से चर्चाओं में है। निरमा देवी लगातार सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहती हैं और मायके पक्ष से भी वह राजनीतिक रूप से खासी समृद्ध हैं। इससे इतर भाजपा की जिलामंत्री मीना वर्मा का नाम भी चर्चाओं में आ गया है। हालांकि इन सभी के लिए बड़ी चुनौती जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतना है।
अब तक यह रहे जिला पंचायत के अध्यक्ष
मीना अग्रवाल निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। मुनेश्वर बख्स सिंह, निरंजन सिंह देव, रघुनंदन शर्मा, श्रीशचंद्र अग्रवाल, महेश सिंह, मोहनलाल वर्मा, राजेश्वरी देवी, अनीता वर्मा, मुकेश अग्रवाल, कामिनी अग्रवाल जिला पंचायत की निर्वाचित अध्यक्ष रही हैं।
इनमें श्रीशचंद्र अग्रवाल और मुकेश अग्रवाल दो-दो बार जिला पंचायत के अध्यक्ष रहे हैं। शिव कुमार त्रिपाठी, बृजराज किशोर दीक्षित और डॉ. शैलेंद्र कुमार द्विवेदी कार्यवाहक अध्यक्ष रहे हैं। इनमें बृजराज किशोर दीक्षित दो बार कार्यवाहक अध्यक्ष रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें