परिवार से लोग तोड़ रहे रिश्ता, तहसील कर्मियों की मिलीभगत से हो रहा फर्जीवाड़ा
- अनिवार्य शिक्षा अधिनियम (आरटीई) के तहत बच्चों का निजी स्कूलों में प्रवेश कराने के लिए अपना रहे नए-नए तरीके
- परिवार के साथ रहने के बावजूद खुद को अलग दिखाकर बनवा रहे आय और निवास प्रमाण पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत लाभ लेने के लिए अभिभावक कागजों पर अपने परिवार से रिश्ता तोड़ रहे हैं। राजस्व अभिलेखों में खुद को परिवार से अलग बताकर गरीब होने का प्रमाण पत्र लगाकर लाभ लेने के प्रयास में लगे हुए है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब फर्जीवाड़ा तहसील कर्मियों की मिलीभगत से हो रहा है।
अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत गरीब परिवार के बच्चों को निकटतम निजी विद्यालय में प्रवेश देने की प्रक्रिया चल रही है। योजना के तहत परिवार की एक लाख से कम वार्षिक आय होने पर ही बच्चे को योजना का लाभ दिया जा सकता है। मगर अधिकांश लोग योजना के तहत लाभ लेने के लिए विभिन्न प्रकार के हथकंडे अपना रहे है। परिवार की वार्षिक आय एक लाख से अधिक न हो। इसके लिए परिवार से अलग रहने और आय प्रमाण पत्र खुद को बेरोजगार या मजदूर दर्शा कर बनवाए हैं।
प्रवेश के लिए आए आवेदनों के सत्यापन में उनके परिवार के साथ रहने की पुष्टि हो रही है, मगर राजस्व विभाग की ओर से जारी प्रमाण पत्र के कारण उनके आवेदनों को लेकर चयन समिति असमंजस में है।
चयन समिति के लोग हैरान
चयन समिति इस बात से हैरान है कि राजस्व विभाग की ओर से किस प्रकार सत्यापन करके आय व निवास प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, जबकि सत्यापन में हकीकत कुछ और आ रही है। समिति का मानना है कि तहसील कर्मियों की मिलीभगत से आय और निवास बनाने के नाम पर कहीं न कहीं फर्जीवाड़ा हुआ है। इससे पात्र बच्चे लाभ से वंचित रह सकते हैं। जिला समन्वयक राकेश शुक्ला ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारियों की ओर से सत्यापन किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर वरीयता सूची तैयार की जाएगी।