पाली। स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी के दावों के बीच ग्रामीण इलाकों के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं बीमार ही नजर आ रही हैं। चिकित्सकों की मनमानी से मरीज परेशान हैं। समय से चिकित्सकों के न पहुंचने के कारण मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी की एक पड़ताल में यह तल्ख हकीकत सामने आई है।
पाली में न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। यहां ओपीडी का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है। बृहस्पतिवार सुबह 9:46 बजे ओपीडी कक्ष में डॉक्टर की कुर्सी खाली मिली। यहां दो प्रशिक्षु युवती मौजूद थीं। फार्मासिस्ट संदीप भी मौजूद थे। पूछने पर बताया गया कि डॉ. सिद्धार्थ की ड्यूटी है, लेकिन वह मौजूद नहीं हैं। डॉक्टर के न आने की वजह पूछने पर कर्मचारियों ने चुप्पी साध ली। पीएचसी में 8-10 मरीज भी बैठे थे, जो चिकित्सक के आने का इंतजार कर रहे थे।
अहमदपुर गांव निवासी रतीराम को पिछले कई दिनों से बुखार आ रहा है। दवा लेने के लिए पीएचसी आए हैं, लेकिन कोई डॉक्टर ही नहीं है। डॉक्टर से दवा मिलती तो शायद राहत मिल जाती। दोबारा आने में तकलीफ होती है।
कछेलिया गांव निवासी सुखरानी के पैरों में ऐंठन और शरीर में दर्द है। 30 मिनट से डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही थीं। डॉक्टर आए नहीं हैं। आने जाने में दिक्कत होती है। इसलिए जब डॉक्टर आएंगे तभी दवा लेकर जाएंगे।
डॉक्टर सिद्धार्थ लगातार पांच दिनों से ओपीडी कर रहे हैं। हो सकता है नाश्ता करने गए हों। पूरी जानकारी की जाएगी। ड्यूटी के प्रति लापरवाही स्वीकार नहीं है। -डॉ. आनंद शुक्ला, चिकित्सा प्रभारी