फोटो-12- मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड की गैलरी में भर्ती मरीज। संवाद
हरदोई। तकरीबन 45 करोड़ रुपये की लागत से बने आईपीडी भवन का उपयोग नहीं हो रहा है। वजह यह कि आईपीडी भवन में बिजली कनेक्शन ही नहीं है। नतीजा यह कि मरीजों को पुराने आईपीडी भवन के गलियारों तक में भर्ती होना पड़ रहा है। यहां मरीजों को मूलभूत सुविधाओं तक के लिए परेशान होना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज परिसर में कई नए भवन बनवाए गए हैं। इनमें ओपीडी और आईपीडी भी शामिल है। आईपीडी भवन का औपचारिक रूप से हस्तांतरण भी मेडिकल कॉलेज को हो चुका है। आईपीडी में 160 बेडों पर मरीज भर्ती किए जाने की व्यवस्था है। आईपीडी भवन का इस्तेमाल अब तक शुरू नहीं हुआ है। पिछले डेढ़ साल से आईपीडी भवन में बिजली व्यवस्था नहीं हो पाई है। मेडिकल कॉलेज की पुरानी आईपीडी जो सेंट्रल लैब के ऊपर है, वहां मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। वार्ड में जगह इतनी कम है कि मरीजों के बेड गलियारों में पड़े हैं। यहां मरीजों के बेड इतने पास हैं कि एक दूसरे के संक्रमण का खतरा बना रहता है।
तीमारदारों के लिए भी नहीं स्थान
आईपीडी में भर्ती मरीजों के साथ आमतौर पर एक तीमारदार के साथ रहने की व्यवस्था रहती है। सेंट्रल लैब के ऊपर बनी आईपीडी में इतनी जगह भी नहीं है कि मरीज का तीमारदार साथ में रह सके। रात में मजबूरी में तीमारदार मरीज के आसपास चादर बिछाकर लेट जाते हैं। ऐसे में गलियारे से निकल पाना भी मुश्किल होता है। यहां मरीजों को तीमारदारों के लिए पड़ी बेंच तक टूटी हुई है।
नवीन आईपीडी भवन में बिजली कनेक्शन के लिए प्रयास लगातार जारी हैं। कार्यदायी संस्था नामित हो चुकी है और आधा पैसा भी दिया जा चुका है। जल्द ही कनेक्शन देकर वार्डाें को शिफ्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रचार्य, मेडिकल कॉलेज
फोटो-12- मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड की गैलरी में भर्ती मरीज। संवाद
फोटो-12- मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड की गैलरी में भर्ती मरीज। संवाद