संसद में ‘माननीयों’ की भूमिका से सूबे के गवर्नर राम नाईक आहत दिखे। इशारों में उन्होंने सदन में लिखी दो पंक्तियों को जीवन में अमल करने पर जोर दिया। बोले, इससे सांसदों की जिंदगी में भी बदलाव आ जाएगा। सदन में लिखी पंक्तियाें का अर्थ है कि ये मेरा, ये तेरा छोटे दिल वाले लोग करते हैं।
उदार चरित्र वाले लोग सारी दुनिया को एक परिवार समझते हैं। वसुधैव कुटुंबकम का सही अर्थ यही है। वे रविवार को अल्लीपुर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया महाविद्यालय में आयोजित अखिल भारती साहित्य परिषद के प्रांतीय सम्मेलन के समापन सत्र में बोल रहे थे।
राज्यपाल ने कहा कि मानवीय जीवन में साहित्य का एक विशेष महत्व होता है। अच्छे साहित्य से समाज को एक नई दिशा व संकीर्णता से ऊपर उठने की दृष्टि मिलती है। संवेदनशील हृदय मनुष्य को ऊ चाइयों तक ले जाता है। साहित्यकार व कवि की एक पंक्ति जीवन का मार्ग दर्शन कर देती है। इसलिए समाज में अच्छे साहित्य की जरूरत है।
वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा पर जोर देते हुए कहाकि इसी में दुनिया का कल्याण है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों की बड़ी जिम्मेदारी है कि वह अच्छा साहित्य लिखें और आमजन की जिम्मेदारी है कि वह उस अच्छे साहित्य को पढ़कर जीवन में उतारें। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज समाज का विदारक चित्रण देखने को मिल रहा है।
इसे सुधारने में साहित्यकार की अहम भूमिका होगी। उन्होंने अखिल भारती साहित्य परिषद की सराहना करते हुए कहा कि देश की सभी भाषाआेें के प्रति इसमेें काम हो रहा है। इस मौके पर उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति के व्यक्तित्व व कृतित्व को याद करते हुए कहाकि वह पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जो कार्यकाल पूरा होने के बाद वह विद्यार्थी, युवाओं व बुजुर्गों के बीच पहुंचे और उन्हें एक नई प्रेरणा दी। राष्ट्रीय शोक के चलते सम्मान समारोह स्थगित कर दिया गया।