हज पूरा करने के बाद हिंदुस्तानी हाजियों की वतन वापसी शुरू हो गई है।
मक्का के बाद मिना हादसे में मौत का मंजर देख कर लौटे हाजियों ने बताया कि
अरकान की अदायगी के बाद वह अपने पड़ाव की ओर लौट रहे थे कि माहौल बदल गया।
जो जहां था वहीं ठहर गया। थोड़ी देर को लगा कि समय ही ठहर गया है। एंबुलेंस
दौड़ने लगीं और सबके चेहरों पर दहशत दिखने
लगी। हाजियों ने कहा कि यह सब
खुदा की मर्जी थी और वहां की मौत-जिंदगी सब बेहतर हैं। पिहानी से हज यात्रा
को जाने वालों में इस बार नईबस्ती के जलालुद्दीन उर्फ टक्करी और चपरतला
रोड निवासी सादुल्लाह भी शामिल हैं। हाजी होकर बदले हुए माहौल में वापस आए
हाजी जलालुद्दीन कहते हैं कि भगदड़ से तकरीबन बीस मिनट पहले ही वह मिना का
मैदान छोड़ चुके थे।
रमी-ए-जमरात (शैतान के प्रतीक को कंकर मारने की रस्म)
जारी थी। अचानक वातावरण में एंबुलेंस का सायरन गूंजने लगा। जो जहां था वहीं
पर ठहर गया। इतनी भारी भीड़ में देर तक यह पता नहीं चल पा रहा था कि हुआ
क्या है। फिर साथ के लोगोें को सोशल साइट और फिर फोन के जरिए हादसे का सही
पता चला। सऊदी हुकूमत के इंतजाम की तारीफ करते हुए
वह कहते हैं कि हादसे
के कारण जो भी रहे, लेकिन इसके बाद जिस तरह सऊदी हुकूमत ने तत्परता दिखाई
वह काबिले तारीफ है। इससे पहले क्रेन हादसे मेें भी बादशाह ने गुलामे नबी
होने का सबूत देते हुए सभी जनाजों को कांधा दिया,जो प्रभावित कर गया। हाजी
सादुल्लाह ने बताया कि मक्का में वह जहां ठहरे थे वहां से हरम का नजारा साफ
दिख रहा था। आसमान में
अचानक बादल उठे और हवाओं के साथी पानी बरसने लगा।
हवाओं के जोर से क्रेन ढही और मंजर बदल गया। हर तरफ चीख पुकार थी। वह लोग
दूर होने के कारण चपेट में आने से बच गए। हादसों के बाद सकुशल वतन वापसी पर
दोनोें हाजियों ने कहा कि यह सब खुदा की मर्जी है। यहां की जिंदगी और मौत
मुबारक हैं। ऐसे हादसे दु: ख जरूर देते हैं लेकिन हादसा कहीं भी हो सकता है
और ऐसी जगह पर मौत शहीदों के लिए एक खुशनसीबी ही है।