मल्लावां (हरदोई)। विकास खंड के राघौपुर गांव में शनिवार को दो दिवसीय हथिया मेला संपन्न हो गया। मेला के पहले दिन शुक्रवार को परंपरागत रूप से लकड़ी का हाथी बनाकर उसे कंबल ओढ़ाकर सजाया गया। श्रद्धालुओं ने इसका पूजन किया फिर 16 लोगों ने कंधे पर राघौपुर से हजरतपुर व औसानपुर गांव में घुमाया। इसके बाद मेला स्थल पर लौट आए।
बबलू सेंगर ने बताया कि करीब पांच सौ वर्ष पहले राघौपुर निवासी ठाकुर राघौदास नाराज होकर ग्वालियर चले गए थे। काफी समय तक वह वापस नहीं आए और वहां के राजा के घर पर नौकरी कर ली। उन्होेंने बताया कि जब ग्वालियर के राजा को पता चला कि यह राघौपुर के राजा साहब के भाई है, तो उन्होंने अपने दरबारों से उनको राघौपुर पहुंचाने की बात कहकर धन आदि दिया, लेकिन ग्वालियर में होली के अगले दिन दो हाथी बनाकर पूजा की जाती थी।
तो राघौदास ने कुछ न लेकर एक हाथी दान में मांग लिया और उसे लेकर चले आए। तक से लेकर आज तक होली के अगले दिन राघौपुर में हाथी बनाकर क्षेत्रीय लोगाें के अलावा दूर दराज के लोग पूजा करने आते हैं और पूजा करने के बाद राघौपुर के अलावा हजरतपुर, औसानपुर में भी घुमाया जाता है।
खास बात यह है कि हजरतपुर के मुस्लिम भी इस हाथी की बड़ी धूमधाम से पूजा करते हैं। इस हाथी को बनाने में जयपाल सिंह, लल्लू सिंह, जगेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार, राजाबाबू सिंह, आदि सहयोग करते है। वहीं, राघौपुर के लोगों ने बताया कि पहले समय में राघौदास की हुकूमत चलती थी।