परिषदीय स्कूलों में बच्चों के दूध देने की योजना पर
अब कनवर्जन कास्ट की कमी का ग्रहण लग गया है। कम कास्ट होने के कारण टीचरों
ने दूध वितरण और नए मेन्यू के अनुसार मिड-डे मील परोसने में हाथ खड़े कर
दिए है। टीचरों को न तो पर्याप्त मात्रा में दूध मिल पा रहा और न ही
कनवर्जन कास्ट की कमी से बच्चोें को मेन्यू के अनुसार भोजन ही मिल पा
रहा हैै।
वहीं शिक्षक संघ ने इस आदेश के विरुद्ध शासन को चेतावनी देते
हुए मेन्यू में बदलाव की मांग की है। इससे प्रदेश सरकार की इस योजना पर
ग्रहण लग गया है। ज्ञात हो कि जिले के परिषदीय, अशासकीय सहायता प्राप्त,
इंटर कालेजों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को पका पकाया
भोजन मुहैया कराया जाता है।
जिले में 2,861 परिषदीय प्राथमिक स्कूल, 1,144
जूनियर हाईस्कूल, 14 समाज कल्याण विभाग से संचालित, 44 सहायता प्राप्त
जूनियर हाईस्कूल और 77 इंटर कालेज शामिल हैं। इन विद्यार्थियों को भोजन
मुहैया कराने के लिए प्राथमिक विद्यालय में विगत शिक्षा सत्र तक 3.59 रुपये
प्रति विद्यार्थी प्राथमिक विद्यालय में और 5.38 रुपये प्रति विद्यालय
जूनियर हाईस्कूल में मुहैया कराया जा रहा था।
शासन की ओर से एक जुलाई से
कनवर्जन कास्ट में पांच फीसदी बढ़ोतरी कर दी गई। इसके तहत अब प्राथमिक
विद्यालयों में 3.76 रुपये प्रति छात्र और 5.64 रुपये प्रति छात्र मिल रहे
हैं। कनवर्जन कास्ट का प्रयोग तेल, मसाले, सब्जी ईंधन आदि में किया जाता
है। विद्यालय में भोजन बनाने को मेन्यू निर्धारित था, जिसमें 15 जुलाई से
परिवर्तित कर दिया गया।
नए मेन्यू में बुधवार को 200 मिली दूध और कोफ्ता
चावल का प्रावधान कर दिया गया। नए मेन्यू के आते ही इसका विरोध शुरू हो
गया। कम लागत में विद्यार्थियों को मीठा दूध और कोफ्ता परोसना टीचरों को
महंगा पड़ रहा है। वहीं उनको पर्याप्त मात्रा में दूध भी नहीं मुहैया हो पा
रहा है। इससे स्कूलों के चूल्हे शांत होते जा रहे और टीचरों का विरोध तेज
होने लगा है। इससे शासन की इस योजना पर ग्रहण लग गया है।