माह में दो बार हुई बारिश और बीच बीच में बूंदाबांदी
ने किसानों के अरमानों को तोड़ दिया। गेहूं, सरसों आदि फसलों से कमाई करने
के सपने देख रहे किसानों को मौसम की बेरुखी ने बर्बादी की डगर पर पहुंचा
दिया है। खरीफ की फसले सूखे की भेंट चढ़ गई, तो रबी की फसलों पर पानी ने
पानी फेर दिया है।
सूखा राहत के नाम पर जिले के किसानों को अगर कुछ मिला,
तो सिर्फ हौसला और रबी की फसलाें से कमाई करने का हौसला बारिश ने पस्त कर
दिया। प्रशासन भी मान रहा कि बारिश से 25 से 30 फीसदी फसलें प्रभावित हुई
है और ग्राम पंचायत बार सर्वे में नुकसान की तस्वीर साफ हो जाएगी।
पर यह
वहीं प्रशासन है जिसने सूखे को लेकर भी 40 फीसदी तक नुकसान होने की बात कही
थी, पर किसानों को धेला न मिल सका। इससे साफ है कि रबी की फसलों में भी
नुकसान का प्रतिशत काफी बढ़ सकता है, पर इस बात की तसल्ली किसानाें को कैसे
हो कि उन्हें इस बार कुछ मुआवजा मिल जाएगा।
पूरे साल खेती किसानी के
लिए खलनायक बना मौसम किसानों को रोने पर मजबूर कर रहा है। कृषि वैज्ञानिक
डा. अनिल कुमार कहते हैं कि यह काफी दुखद है कि पहले सूखा और अब बारिश ने
फसलों को नुकसान पहुंचाया है। जिला कृषि अधिकारी डा. विनोद यादव कहते है कि
बारिश से हुए नुकसान के लिए फसली सर्वे चल रहा है और डीएम को रिपोर्ट दी
जाएगी।
जिलाधिकारी रमेश मिश्रा कहते है कि प्रथम दृष्टया 25 से 30 फीसदी
फसलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने थी, पर बीती रात फिर बारिश हो गई
इससे भी नुकसान पहुंचने की आशंकाएं प्रबल हो गई है। इसको लेकर आकलन कराया
जा रहा है। शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।