हरदोई। संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना में अब ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें कई बड़े बदलाव किए गए हैं। अब कार्यदायी संस्था को लागत राशि अब अग्रिम (एडवांस) नहीं दी जाएगी। स्वीकृति के बाद ही संस्था को भुगतान का अधिकार मिलेगा। ऐसे में संस्था की ओर से काम कराने के बिल-वाउचर फीड करने के बाद भुगतान किया जा सकेगा।
भारत सरकार ने संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (सांसद निधि) के कामों के लिए स्वीकृति, भुगतान में बड़ा बदलाव किया है। भारत सरकार ने इसके लिए mplads.sbi नाम से पोर्टल लांच किया है। प्रस्ताव के ऑनलाइन फीड होने के साथ ही डीएम कार्यदायी संस्था नामित करेंगे। संस्था प्रस्ताव के कामों का भौतिक सत्यापन व उपयोगिता की रिपोर्ट पोर्टल पर ही देगी। काम की उपयोगिता पर ऑनलाइन ही इस्टीमेट लिया जाएगा। इस्टीमेट पर सांसद की ओर से वित्तीय अनुमति और डीएम की ओर से स्वीकृति जारी की जाती है।
यूपीएसआईसी ने कराया पहला काम
ऑनलाइन व्यवस्था प्रभावी होने के बाद हरदोई लोकसभा क्षेत्र से सांसद जयप्रकाश रावत की ओर से पहला प्रस्ताव 20 हाईमास्ट लाइटों का दिया गया। इस पर यूपीएसआइसी लखनऊ को संस्था नामित किया गया। यूपीएसआइसी ने 75 प्रतिशत काम कराने के साथ ही करीब 18 लाख से अधिक का भुगतान भी किया है। 25 लाख की स्वीकृति में से शेष 25 प्रतिशत काम कराने के बाद ही शत प्रतिशत भुगतान हो सकेगा। सांसद जयप्रकाश रावत ने इंटरलॉकिंग के चार काम के और ऑनलाइन ही प्रस्ताव दिए हैं। इन पर ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को संस्था को नामित किया गया है
संसद निधि में ऑनलाइन प्रक्रिया प्रभावी होने से अब काम आसान और पारदर्शी हो गया है। एडवांस राशि न दिए जाने से संस्थाएं काम में लेटलतीफी नहीं कर पाएंगी। काम कराने पर ही भुगतान कर सकेंगी। गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारी भी तय होगी। संस्थाओं को पोर्टल का यूजर आइडी व पासवर्ड प्राप्त कराए गए हैं।
- एमपी सिंह, जिलाधिकारी