शौचालय निर्माण घोटाले में जारी हुई कारण बताओ नोटिस का जवाब न देने पर जिला विकास अधिकारी ने सभी 14 ग्राम विकास अधिकारियों को निलंबित कर दिया। बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई से न सिर्फ सचिवों के खेमे में बल्कि समस्त सरकारी कार्यालयों में एक बार फिर शौचालय निर्माण घोटाले की चर्चा आम हो गई।
पंचायती राज विभाग ने वर्ष 2012-13 एवं 2013-14 में 4384 शौचालयों का निर्माण कराए जाने के लिए धनराशि को अवमुक्त किया गया था लेकिन मात्र 1695 शौचालयों का निर्माण होना जांच में पाया गया। जिसके चलते पंचायती राज विभाग अपने अधीन कार्य करने वाले आठ ग्राम पंचायत अधिकारियों को पहले ही निलंबित कर दिया था। लेकिन विकास विभाग के अधीन कार्य करने वाले 14 ग्राम विकास अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी की गई थी।
जिला विकास अधिकारी उग्रसेन यादव ने इन सभी को शनिवार तक का समय देकर जवाब मांगा था लेकिन किसी ने उनके कारण बताओं नोटिस का जवाब नहीं दिया जिसको अनुशासनहीनता, कर्तब्यों के प्रति रूचि न होने एवं जवाब न दे सक पाने की स्थिति में आरोपों को सत्य मानते हुए सभी 14 ग्राम विकास अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबित होने वाले ग्राम विकास अधिकारियों में हरियावंा रमेश वर्मा, अजय बाजपेई, वरुण कुमार, कोथावां नीरज मिश्रा, सुरसा अमित पांडे, टड़ियावंा अजय मिश्रा, टड़ियावंा शूलपाणि मिश्रा, अभिनव मेहरोत्रा, कृष्ण गोविंद मिश्रा, माधौगंज अशोक कुमार, बिलग्राम विवेक कुमार, शाहाबाद चंद्रपाल कनौजिया एवं टोडरपुर के शरद कुमार शामिल हैं।
निलंबित होने वालों की संख्या 25 पहुंची
शौचालय निर्माण घोटाले में निलंबित होने वालों की संख्या 14 विकास अधिकारियों के निलंबित होने के बाद 25 पहुंच गई है। इससे पूर्व आठ ग्राम पंचायत अधिकारी व तीन सहायक विकास अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। कुल मिलाकर जहां पंचायती राज विभाग ने 11 पंचायत कर्मियों को निलंबित किया वहीं विकास विभाग ने 14 कर्मियों को निलंबित कर दिया।