हरदोई। खरीफ की मुख्य फसल धान में यूरिया के छिड़काव का समय चल रहा है। क्रियाशील 60 सहकारी समितियों पर यूरिया का टोटा है। समितियों पर यूरिया न होने से किसानों को निजी विक्रेताओं पर आश्रित होना पड़ रहा है। इससे किसानों को विक्रेताओं के यहां मिलने वाली ब्रांड की यूरिया को ही प्रयोग में लाना पड़ रहा है। किसान संगठनों ने समितियों पर यूरिया उपलब्ध कराने की मांग की है।
सहकारिता विभाग की ओर से 60 साधन सहकारी समितियों को संचालित कराया जा रहा है। इन समितियों के माध्यम से किसानों को यूरिया, डीएपी आदि का वितरण कराया जाता है। खरीफ फसलों में सहकारी समितियों की ओर से 10,418 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया भी गया है लेकिन, वर्तमान में यूरिया न होने से किसान समितियों से मायूस हो रहे हैं। समितियों पर मिलने वाली यूरिया व डीएपी के प्रति किसानों की विश्वसनीयता अधिक हो गई है। इससे किसान समितियों के माध्यम से मिलने वाले यूरिया न मिलने से निजी विक्रेताओं के यहां मिलने वाले ब्रांड की यूरिया की मजबूरन खरीदारी कर रहे हैं। किसान संगठन के प्रतिनिधियों ने भी समितियों पर यूरिया न होने की जानकारी अधिकारियों को दी है और मांग की है कि समितियों पर यूरिया उपलब्ध कराई जाए।
सहकारिता के सहायक निबंधक आशीष कुमार मेहता ने बताया कि समितियों पर उपलब्ध यूरिया का वितरण करा दिया गया है, इससे स्टॉक शून्य हो गया है। यूरिया की मांग की गई है। जल्द ही एक रैक यूरिया मिलने की उम्मीद है।