हरदोई। जिला महिला चिकित्सालय में जननी सुरक्षा योजना दम तोड़ रही है। चिकित्सकों की कमी से अस्पताल की व्यवस्थाएं बीमार हैं। ओपीडी सेवाएं भगवान भरोसे हैं। गुरुवार सुबह से ओपीडी मेें मरीजों की भीड़ रही लेकिन चिकित्सकों के छुट्टी पर होने से कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। एक चिकित्सक ने चार घंटे में 357 मरीजों को परामर्श देकर औपचारिकता निभाई। काफी संख्या में महिलाएं बिना परामर्श के लौट गईं।
जिला महिला अस्पताल में देखने को तो चिकित्सकों की लंबी फौज है, लेकिन हकीकत इससे जुदा है। चिकित्सक कहां हैं, इसका अस्पताल प्रशासन को भी पता नहीं है। अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या पर नजर डालें तो संविदा से लेकर स्थायी लगभग 18 से 20 चिकित्सक हैं। इसके बाद भी अस्पताल विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। जिससे कारण मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पार रहा है। आलम ये है कि गुरुवार को अवकाश के कारण अस्पताल की सेवाएं सुबह 8 से 12 बजे तक संचालित रहीं। इस दौरान 357 पर्चे बने।
ओपीडी में मौजूद लोनार निवासी मरीज ऊषा देवी, मझिगंवा निवासी रानी आदि ने बताया कि सुबह से चिकित्सक कक्ष में कुर्सियां खाली पड़ी हैं। जिसके कारण परामर्श नहीं मिल सका है। वहीं ओपीडी में मात्र एक चिकित्सक डॉ. आरती मिश्रा मरीजों को परामर्श देती रहीं। उन्होंने चार घंटे की ओपीडी में 357 मरीजों को परामर्श दिया। सीएमएस डॉ. रविंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सकों की कमी है। गुरुवार को अवकाश के चलते चिकित्सक छुट़्टी पर थे। ओपीडी सेवाएं जैसे-तैसे दोपहर तक चलाई जा सकीं।
एक गायनकोलॉजिस्ट के सहारे अस्पताल
हरदोई। वर्षों से महिला अस्पताल एक गायनकोलॉजिस्ट के सहारे चल रहा है। अस्पताल प्रशासन की मानें तो अस्पताल में अकेले गायनकोलॉजिस्ट डॉ. वीके चौधरी सेवाएं दे रहे हैं। जिसके चलते ज्यादातर मरीजों को रेफर लेटर थमाया जा रहा है।