हरदोई। ऑडिट आपत्तियों से जुड़े अभिलेख देने में ग्राम पंचायतों के जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। अभिलेख न देने से ऑडिट आपत्तियां लंबित हैं। 15 दिन में अभिलेख न देने पर प्रधान और पंचायत सचिवों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
गांवों में विकास और अन्य कार्य पंचायतीराज विभाग, राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग के मद से कराए जाते हैं। इनका समय-समय पर ऑडिट भी किया जाता है। जिले में लेखा परीक्षा विभाग के ऑडिट में मिली गड़बड़ियों पर पंचायतीराज विभाग ने संबंधित पंचायतों से अभिलेख तलब किए गए हैं। ऑडिट आपत्तियों का समय से निराकरण न कराने पर प्रकरणों की शासन स्तर से समीक्षा भी शुरू हुई है। परिपालन कराए जाने के लिए बड़ी गड़बड़ी वाली पंचायतों के जिम्मेदारों को निराकरण के लिए चेतावनी भी दी गई है।
जिला पंचायत राज अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि ऑडिट आपत्तियों का परिपालन न कराने वाली ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों से अभिलेख मांगे गए हैं। 15 दिन के अंदर अभिलेख न देने वाली पंचायत के लिए संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
केस एक :
विकास खंड अहिरोरी की ग्राम पंचायत अहिरोरी में करीब 2.21 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब अभी तक नहीं मिला है। साल 2021-22 और 2022-23 की ऑडिट आपत्तियों का भी परिपालन नहीं कराया गया है। तत्कालीन प्रधान, प्रधान और संबंधित पंचायत सचिव को अभिलेख उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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केस दो :
विकास खंड टोडरपुर की ग्राम पंचायत टोडरपुर में साल 2022-23 में 71,89,402 रुपये की गड़बड़ी ऑडिट में सामने आई थी। खर्च का हिसाब-किताब न मिलने पर अभिलेख तलब किए गए हैं।
केस तीन :
विकास खंड अहिरोरी की ग्राम पंचायत काईमऊ में साल 2020-21 में किए गए खर्च में से 25,87,039 रुपये का हिसाब-किताब नहीं मिला। पंचायत से अभिलेख तलब किए गए हैं।