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कष्टों को हरने कल नौका पर सवार होकर आ रही मां

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फोटो-17- सिनेमा रोड पर नवरात्र के पूजन को लेकर सजी दुकान। संवाद
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फोटो-18- शास्त्री उमाकांत अवस्थी। संवाद
कष्टों को हरने कल आएंगी मां
- 25 मार्च से शुरू होंगे नवरात्र, दो अप्रैल को मनाई जाएगी नवमी
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। चैत्र नवरात्र की शुरूआत 25 मार्च बुधवार हो रही है। शास्त्रों के जानकारों ने बताया कि इस बार देवी मां नौका यानी नाव पर चढ़कर आएंगी। इधर मां के आगमन को लेकर बाजार में दुकानें सज गई हैं।
चैत्र नवरात्र 25 मार्च से शुरू होने जा रही है जो दो अप्रैल तक चलेगें। नवरात्र के नौ दिनों में देवी मां के अलग-अलग नौ स्वरूपों की उपासना की जाएगी। कहा जाता है कि देवी मां इन दिनों अपने भक्तों का कल्याण करती हैं। शास्त्रों के जानकार उमाकांत अवस्थी बताते हैं कि चैत्र नवरात्र की अष्टमी एक अप्रैल को मनाई जाएगी। कन्याभोज दो अप्रैल को होगा। इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी 25 मार्च से विक्रम नवसंत्सवर 2077 का प्रारंभ होगा। इस तरह से देखें तो चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष का प्रारंभ एक ही दिन हो रहा है।
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तिथिवार इस तरह की जाएगी मां की अराधना
25 मार्च- प्रथमा तिथि, गुड़ी पड़वा, नवरात्र आरंभ, घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा, हिंदू नव वर्ष की शुरुआत
26 मार्च- द्वितीया तिथि, सर्वार्थ सिद्धि योग, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
27 मार्च- तृतीया तिथि, सर्वार्थ सिद्धि योग, मां चंद्रघंटा की पूजा
28 मार्च- चतुर्थी तिथि, मां कुष्मांडा की पूजा
29 मार्च- पंचमी तिथि, रवि योग, मां स्कंदमाता की पूजा
30 मार्च- षष्ठी तिथि, मां कात्यायनी की पूजा
31 मार्च- सप्तमी तिथि, मां कालरात्रि की पूजा
1 अप्रैल- अष्टमी तिथि, मां महागौरी की पूजा
2 अप्रैल- नवमी तिथि, मां सिद्धिदात्रि की पूजा
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मां के आशीर्वाद से होता मंगल ही मंगल
हरदोई। शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि साधक को राजयोग की प्राप्ति होने के साथ अरोग्यता मिलेगी। मां लोगों को हर तरह के भय, बाधा, रोग व दोष से मुक्ति दिलाएगी। नवरात्र में मां का पूजन पूर्ण श्रद्धा से करने होंगे।
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ऐसे वर्ष को बनाएं शुभ
हरदोई। चैत्र नवरात्र के अवसर पर नौ दिनों तक माता की पूजा नियमित करें और हर दिन कवच, कीलक अर्गलास्तोत्र का पाठ करते हुए हो सके तो हर दिन एक कन्या भोजन करवाएं और दशमी तिथि को कन्या को वस्त्र और दक्षिणा सहित विदा करें। हर दिन माता को पूजा करते समय एक लवंग जरूर चढ़ाएं और इसे प्रसाद रूप में ग्रहण करें।
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