फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hardoi News: मरीजों को राहत नही, नवनर्मित भवन में तकनीकी खांमिया

Sun, 05 Feb 2023 10:52 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
विज्ञापन
विज्ञापन
मरीजों को अभी राहत नही... नवनिर्मित ओपीडी भवन में खामियां
विज्ञापन

- 213 करोड़ की लागत से बन रहा है मेडिकल कॉलेज का भवन, तीसरी बार ड्राइंग बदलने का प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। 213 करोड़ की लागत से जिला अस्पताल परिसर में बन रहे मेडिकल कॉलेज के ओपीडी भवन में तकनीकी अड़चन आ गई है। ओपीडी में दिव्यांग या फिर पैर टूूटे मरीजों के लिए भी कोई आवागमन की कोई व्यवस्था नहीं है। नए प्राचार्य ने इन्हीं परेशानियों को देखते हुए ओपीडी को लेने से इन्कार कर दिया है। उन्होंने भूतल तल में आर्थो विभाग की व्यवस्था कराने के लिए तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए ड्राइंग को तीसरी बार सही करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। ऐसी दशा में ओपीडी में मरीजों को अभी जल्द राहत मिलती नहीं दिखाई दे रही है। अब अगर नए सिरे से ड्राइंग बनती है तो कम से डेढ़ महीने का समय और लग जाएगा।
ओपीडी व मर्च्युरी भवन का निर्माण कार्य 31 दिसम्बर 2022 तक पूरा होना था लेकिन अभी भी ओपीडी में निर्माण कार्य चल रहा है। साफ सफाई से लेकर कुछ काम अभी भी बाकी है। राजकीय निर्माण निगम के सहायक अधिशाषी अभियंता पंकज कुमार का कहना है कि मर्च्युरी का भवन पूरी तरह से तैयार है। इसे हैंडओवर करने की प्रक्रिया चल रही है।
विज्ञापन

ओपीडी का निर्माण करा रहे जीएम बीएन त्रिपाठी का दावा है कि ओपीडी भवन पूरी तरह से तैयार है। उनके प्रपोजल में जो था, उसी के आधार पर भवन का निर्माण करा दिया गया है। हालांकि अब नए प्राचार्य आर्य देश दीपक पाल ने अपना अलग प्रस्ताव दिया है। प्राचार्य का कहना है कि मरीजों की सुविधा को देखते हुए तीसरी बार ड्राइंग संशोधन के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसमें दिव्यागों व पैर टूटने वाली मरीजों के भूतल पर ही इलाज मिलने की सुविधा कराई जाएगी। इसके लिए आर्थों विभाग पहले फ्लोर पर बना है, जोकि ठीक नहीं है। इसके अलावा मरीजों की सुविधा के लिए प्रत्येक फ्लोर पर माइनरी ओपीडी होनी चाहिए, जोकि नहीं है।
इनसेट
दिव्यागों के लिए हो सकती है मुसीबत
ओपीडी का चार मंजिला भवन है। यहां पर एक से दूसरे तल तक जाने के लिए दो सीढ़ी वाला जीना दिया गया। दो लिफ्ट की व्यवस्था है, लेकिन रैंप का जीना नहीं बनाया गया। लोगों की मानें तो अगर बिजली चली गई या फिर कोई तकनीकी फाल्ट आ गई तो फिर दिव्यांगों के लिए मुसीबत हो जाएगी।
विज्ञापन


निमार्ण कार्य के लिए मिली धनराशि
सहायक अधिशाषी अभियंता पंकज कुमार बताया कि अब तक 18040.22 लाख रुपए मिल चुके हैं। इसमें 17501.54 लाख रुपये खर्च हुए। अब तक 90 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। राजकीय मेडिकल काॅलेज का निर्माण मार्च 2019 से शुरु हुआ था। इसे मार्च 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कोरोना कॉल को देखते हुए समय अवधि बढ़ाई गई थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें