जिले में फर्जी डिग्रीधारकों को आश्रय मिलने के कारण
गैर जिले के लोग यहां पर नियुक्तियां पा रहे हैं। फर्जीवाड़े के रैकेट के
कारण संदिग्ध लोगों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। एसआईटी की जांच शुरू
होने से फर्जीवाड़ा में शामिल लोगों की नींद उड़ गई है। अगर सही से जांच
हुई तो जिले में सैकड़ों नहीं हजारों मुन्नाभाई निकल कर सामने आ जाएंगे।
प्रदेश
सरकार की ओर से वर्ष 04 में बीएड डिग्रीधारकों को विशिष्ट बीटीसी का छह
माह का प्रशिक्षण देकर परिषदीय स्कूलों में सहायक टीचर के पद पर नियुक्ति
करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। वर्ष 04 में जिले में विशिष्ट बीटीसी के
तहत तैनात 402 आवेदकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
जिसमें 379
का चयन किया गया था। वर्ष 07 में 1,520 के सापेक्ष 1,152 आवेदक चयनित हुए
थे। वहीं वर्ष 08 में 584 के सापेक्ष के 559 का चयन किया गया था। इसके
अलावा वर्ष 08 में सामान्य चयन के तहत 409 का चयन किया गया था। इसके अलावा
जिले में वर्तमान में 3,000 के सापेक्ष अभी तक 2,518 प्रशिक्षु की तैनाती
की जा चुकी है।
इसके अलावा जिले में अब तक 1,380 के सापेक्ष 1,229
अनुदेशकों की नियुक्ति की जा चुकी है। इसके अलावा जिले में बीटीसी के
तहत प्रति वर्ष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के
अनुसार वर्ष 04 में 30, वर्ष 07 में सात, प्रशिक्षु टीचरों में तीन,
कस्तूरबा स्कूल में दो टीचरों के फर्जी प्रमाण पत्र के मामले में प्रकाश
में आ चुके है।
इसके अलावा कई के विकलांग प्रमाण पत्र व जाति प्रमाण पत्र
फर्जी होने के मामले प्रकाश में आ चुके है। इसके अलावा बीटीसी प्रशिक्षण
प्राप्त करने वाले 13 और अनुदेशक के 177 आवेदकों के प्रमाण पत्रों में
संदेह होने पर जांच की जा रही है। उधर, विशिष्ट बीटीसी के तहत वर्ष 04 से
09 तक हुई नियुक्तियों में डायट प्रशासन की ओर से सत्यापन कराया गया था।