अफसरों की लापरवाही के चलते एआरटीओ दफ्तर मेें आवेदक
परेशान हो रहे हैं। आलम यह है कि सुबह से लेकर शाम तक लाइसेंस बनने से लेकर
रिन्यूवल कराने के लिए कतार मेें लगने के बावजूद बगैर सुविधा शुल्क दिए
काम नहीं हो रहा है।
हैरत की बात है कि इसके पीछे विभागीय जिम्मेदार भी खेल
कर रहे, पर अफसर इस पर ध्यान नहीं दे रहे। इसके अलावा कुछ बाहरी लोग
भी दफ्तर के कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं, इसके बाद भी अधिकारी इस ओर
ध्यान नहीं दे रहे। उधर, एआरटीओ कार्यालय में आरआई की तैनाती नहीं है।
सीतापुर के आरआई के पास जिले का प्रभार है। इस कारण वह सप्ताह में तीन दिन
आते हैं और उन्हीं तीन दिन में ही लाइसेंस आदि का कार्य हो पाता है। इससे
आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा एआरटीओ कार्यालय
में वाहनों के मेंटीनेंस के नाम पर भी जमकर गोलमाल किया जाता है।
विभागीय
अधिकारी जर्जर वाहन को भी उपयोगी बताकर उसके संचालन की अनुमति दे देते है।
इस कारण जिले की सड़कों ऐसे वाहन है जो निर्धारित अवधि पूरी कर चुके है, पर
अभी भी सड़काें पर धड़ल्ले से फर्राटा भर रहे है।
एआरटीओ कार्यालय परिसर से लेकर बाहर गेट के आसपास बाहरी लोगों का
जमावड़ा लगा था। कोई बाइक पर रखकर तो कोई पेड़ के नीचे बैठकर आवेदकों के
फार्म भरने में लगा हुआ था। कोई आवेदकों को नियम बता रहा, तो कोई भीड़ से
बचने को शार्टकट समझा रहा था।
बायोमैट्रिक अस्थाई लाइसेंस के
लिए बने काउंटर पर कुछ लोग मौजूद थे, जो अंदर बैठे कर्मचारियों से लाइसेंस
के विषय में जानकारी करने में लगे हुए थे। वह कर्मचारियों से शार्टकट
रास्ता पूछ रहे थे। एआरटीओ कार्यालय में फीस काउंटर पर
आवेदकों की लंबी लाइन लगी हुई थी।
फीस जमा करने को आवेदकोें के बीच में
पहुंचकर बाहरी लोग फीस जमा करने में लगे हुए थे। आवेदक मायूस खड़े हुए थे। काउंटर पर जहां बाहर आवेदक लंबी लाइन में फीस जमा करने में जद्दोजहद
कर रहे थे, वहीं अंदर काउंटर नंबर आठ पर फीस जमा करने को पीछे से बाहरी लोग
लगे थे।
काउंटर के अंदर का दरवाजा हर दस मिनट के बाद खुल व बंद हो रहा था,
जिसमें फीस जमा हो रही थी। बायोमैट्रिक लाइसेंस बनवाने को
काउंटर के बाहर आवेदकों की भारी भीड़ जमा थी। यहां पर बाहरी लोग लगे हुए
थे। उनका कहना था कि टोकन के अनुसार ही लाइसेंस धारक की फोटो खींची जा रही
है, मगर वहां पर भी उन्हीं बाहरी लोगों को ही प्राथमिकता मिल रही थी।