भारत सरकार ने 14 मार्च 2016 को शिमला शहर में बंदरों को छह महीने के लिए वर्मिन घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी।
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शहरवासियों को कटखने और उत्पाती बंदरों के आतंक से निजात मिलने की उम्मीद बढ़ी है। इस संबंध में नगर पालिका ने वन विभाग को पत्र लिखकर बंदर पकड़वाने की अनुमति मांगी है। जिला वन अधिकारी (डीएफओ) जल्द ही पालिका के पत्र को निदेशालय भेजेंगे, वहां से अनुमति मिलते ही बंदरों की धरपकड़ शुरू हो जाएगी।
शहर के लोग कटखने बंदरों के आतंक से परेशान हैं। बंदर लोगों को काटने के साथ नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। परेशान लोग नगर पालिका और वन विभाग में बंदरों से निजात दिलाने की गुहार लगा चुके हैं। शहरवासी पीयूष, देवेंद्र, भुवनेश, ज्ञानेंद्र आदि ने बताया कि बंदरों के आतंक के चलते घरों की छतों पर जाने से भी डर लगता है।
वे कब हमला कर दें या सामान तहस-नहस कर दें कुछ नहीं कहा जा सकता। इन परेशानियों को देखते हुए नगर पालिका ने वन विभाग को पत्र लिखकर बंदरों को पकड़ने की अनुमति मांगी है। बंदर पकड़वाने का टेंडर भी पालिका निकलवा चुकी है। वन विभाग की अनुमति के बाद ही पालिका बंदर पकड़वा सकती है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मथुरा की तरफ की कुछ टीमें बंदर पकड़ने में एक्सपर्ट हैं। इन टीमों के सदस्य बंदर की आवाज निकलाकर उन्हें जाल में फंसा लेते हैं। गौरतलब है कि तत्कालीन जिलाधिकारी रमेश मिश्र ने बंदरों को पकड़वाने के लिए योजना बनाई थी, किंतु बजट के अभाव में योजना परवान नहीं चढ़ पाई थी। डीएफओ अतुल अस्थाना ने बताया कि नगर पालिका का पत्र जल्द निदेशालय भेज दिया जाएगा। वहां से अनुमति मिलने पर ही पालिका बंदरों को पकड़वा सकती है’