नि:शुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार एक्ट 09 के
तहत जिले में वर्ष 13 से अब तक एक भी बच्चे का प्रवेश निजी स्कूलों में
नहीं दिलाया जा सका है। केंद्र सरकार की इस योजना में जिले में स्कूलाें का
चिन्हांकन तक नहीं किया गया और न ही एक भी गरीब बच्चे का प्रवेश दिलाया जा
सका है।
विभाग को इस बाबत विगत वर्ष पांच आवेदन भी मिले थे, पर उन
आवेदनों को क्या हुआ इसका जवाब किसी के पास नहीं है, जबकि इस योजना के तहत
निजी स्कूलों को विद्यार्थियों की फीस के लिए 450 रुपये प्रति विद्यार्थी
के रूप में देने का प्राविधान है। इस योजना का व्यापक प्रचार प्रसार न होने
से लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं है।
ज्ञात हो कि नि:शुल्क और अनिवार्य
बाल शिक्षा के अधिकार एक्ट 09 धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत आस पास के गैर
सहायतित मान्यता प्राप्त स्कूलों में एससी/एसटी, शैक्षिक व सामाजिक रूप से
पिछड़े वर्ग बच्चों, नि:शक्त बच्चों, निराश्रित बेघर बच्चों, एचआईवी, कैंसर
पीड़ित माता-पिता के बच्चोें, गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले
बच्चों।
विकलांग व वृद्धावस्था की पेंशन पाने वालों के बच्चों को उनके
निवासी के आस पास के मान्यता प्राप्त स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा की
व्यवस्था है। एक लाख तक आय वालों के अभिभावकों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की
जानी है। यदि क्षेत्र में परिषदीय स्कूल नहीं है, तो उस क्षेत्र में
संचालित विद्यालयों में प्रवेश दिलाने का प्राविधान है।
बच्चों को एडमिशन,
कापी, किताबें सभी निशुल्क हैं। इन सबके बाद भी एक भी विद्यालय में एक भी
गरीब बच्चे का प्रवेश नहीं कराया गया। इसके लिए विभाग की ओर से निजी
स्कूलों को 450 रुपये प्रति छात्र धनराशि भी उपलब्ध कराई जाती है।
इस
बाबत जिला समन्वयक बालिका शिक्षा बलवीर शास्त्री का कहना है कि विगत वर्ष
पांच आवेदन आए थे, पर उनके प्रवेश के लिए खंड शिक्षा अधिकारी को लिखा गया
था। प्रवेश हुए या नहीं इसकी जानकारी नहीं है, क्योंकि किसी भी निजी स्कूल
से फीस की मांग नहीं की गई।