दो माह से लापता किसान का शव गांव से तीन किलोमीटर दूर जंगल में पेड़ पर फंदे से बृहस्पतिवार को लटकता मिला। जंगल में लकड़ियां बीनने गईं किशोरियों ने शव लटका देख ग्रामीणों को सूचना दी।
ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे परिजन ने शव की शिनाख्त कपड़ों से की। गले और कंकाल बन चुके शव को पुलिस ने कब्जे में ले लिया। किसान के परिजनों ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाए हैं।
अतरौली क्षेत्र की ग्राम पंचायत सोनिकपुर के मजरा गौरी खुर्द निवासी शिवनाथ (55) पुत्र बड़कौनू खेती किसानी करते थे। शिवनाथ नौ अक्तूबर की दोपहर गांव से संदिग्ध हालात में लापता हो गए थे।
परिजनों ने खोजबीन की, लेकिन पता न चलने पर 15 नवंबर को अतरौली थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। गौरीखुर्द गांव से करीब तीन किमी दूर जाहिदपुर गांव के जंगल में सुबह सात बजे लकड़ियां बीनने गईं किशोरियों ने पेड़ से शव लटकता देख ग्रामीणों को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जानकारी किसान के परिजनों को दी। मौके पर पहुंचे परिजनों और ग्रामीणों ने शव की शिनाख्त शिवनाथ के रूप में की।
प्रभारी निरीक्षक उमाशंकर उत्तम ने बताया कि कि शव काफी पुराना लग रहा है। शव का निचला हिस्सा काफी गल चुका है और कंकाल की तरह नजर आ रहा है। बताया कि शिवनाथ मानसिक रूप से बीमार थे।
पहले भी वह कई बार घर से लापता हो चुके थे। कई बार परिजन उन्हें खोज कर घर भी ला चुके थे। बताया कि मामला खुदकुशी का लग रहा है। परिजनों ने भी कोई आरोप नहीं लगाए हैं।
उधर, किसान का शव देख पत्नी चिंता देवी बिलख पड़ीं। उनके परिवार में दो विवाहित बेटियों पुत्रियों के अलावा तीन पुत्र हैं। परिजन भी शिवनाथ के मानसिक रूप से बीमार होने की बात स्वीकार कर रहे हैं।
पूरे मामले में महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अतरौली थाना क्षेत्र के जंगल में ही शव दो माह से अधिक समय तक लटकता रहा, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। सूत्र बताते हैं कि ग्रामीणों का आना जाना जंगल में बना रहता है, लेकिन फिर भी किसी को शव के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।