हरदोई। शहर कोतवाली से जो केस प्रापर्टी गायब हुई थी वह खनन माफियाआें की कृपा से अचानक कोतवाली में प्रकट हो गई। यह बात और है कि गुम हुई केस प्रापर्टी जिस तरह से कोतवाली में प्रकट हुई है, उससे यह अंदाजा आसानी से लग जाता है कि इसकी व्यवस्था पुलिस ने ताजा-ताजा ही कराई है।
बीते दिनाें अमर उजाला ने खुलासा किया था कि शहर कोतवाली से केस प्रापर्टी गायब हो गई है। दरअसल सीजेएम अतुल सिंह ने खान अधिकारी एसके अग्रवाल को निर्देश दिए थे कि अवैध खनन से निकाली गई खनिज संपदा बालू, मिट्टी, स्टोन डस्ट से भरे जिन वाहनों का चालान करने के बाद रिलीज ऑर्डर जारी हुआ है, उससे जब्त माल की स्थिति क्या है।
पूरे मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुलिस जिन वाहनों का चालान करती है, न्यायालय उन वाहनों को रिलीज करने का ऑर्डर देता है। जबकि इन वाहनाें में लोड खनिज संपदा को संबंधित थाने में ही सुरक्षित रखने के निर्देश होते हैं। बीते दिनों सीजेएम ने नौ मामलों का उल्लेख करते हुए खान अधिकारी से रिपोर्ट मांगी थी।
खान अधिकारी ने स्पष्ट तौर पर अपनी रिपोर्ट दी थी जिसमें कहा था कि शहर कोतवाली में खनिज संपदा सुरक्षित नहीं रखी गई है। सत्यापन के लिये पहुंचे खान अधिकारी को मौके पर कोई भी खनिज संपदा नहीं मिली थी। इस रिपोर्ट को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
इसके बाद न्यायालय का रुख सख्त हुआ तो पुलिस ने कार्रवाई का अपना जाना पहचाना रवैया अपना लिया। शहर कोतवाल ने रातों-रात खनन माफियाआें से संपर्क साधा। इसके बाद बालू की व्यवस्था कराई गई। रातों-रात बालू का एक ढेर शहर कोतवाली के बाहर लगा दिया गया। मतलब यह कि जो केस प्रापर्टी कोतवाली से गायब हो गई थी वह पुलिस ने रातों-रात खोज निकाली।
केस प्रापर्टी पहुंची तब सिटी मजिस्ट्रेट ने की जांच
विश्वस्त सूत्र बतातें है कि न्यायालय के रुख के बाद सिटी मजिस्ट्रेट केस प्रापर्टी गायब होने के मामले में जांच के लिए शहर कोतवाली पहुंची। सिटी मजिस्ट्रेट कोतवाली तब पहुंची जब शहर कोतवाल ने केस प्रापर्टी की व्यवस्था कर ली। बालू के ढेर को देखकर नगर मजिस्ट्रेट ने पूछा कि स्टोन डस्ट, मिट्टी जैसी खनिज संपदाएं कहां है तो जवाब दिया गया कि बालू के इसी ढेर के नीचे अन्य केस प्रापर्टी भी दबी हुई हैं। फिलहाल अब सबकी निगाह सिटी मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट पर है।
काश चोरियाें के खुलासे में भी करते ऐसी मेहनत
कोतवाली से गायब हुई केस प्रॉपर्टी को खोज निकालने में पुलिस ने बड़ी मेहनत की। अनौपचारिक बातचीत में यह दावा पुलिस ही करती है। अब सवाल ये है कि शहर में पिछले कुछ दिनों में हुई ताबड़तोड़ चोरियों का खुलासा करने में भी पुलिस इतनी ही मेहनत क्यों नहीं करती। काश पुलिस चोरियाें के खुलासे में मेहनत करे तो शहरवासी भी चैन की नींद सोते।
खुल गई खनन माफियाओं और पुलिस गठजोड़ की पोल
अवैध खनन के माफियाआें से शहर कोतवाली पुलिस के दोस्ताना संबंध किसी से छिपे नही हैं। केस प्रापर्टी गायब होने के बाद दोबारा प्रकट होने के मामले में खनन माफियाओं और शहर कोतवाली पुलिस के गठजोड़ की पोल खुल गई। खनन माफियाओं ने ही शहर कोतवाल के इशारे पर बालू की व्यवस्था की। न सिर्फ व्यवस्था की बल्कि इसे कोतवाली के अंदर सुरक्षित उतरवाने में भी अपने ही वाहन से लेकर मजदूरों तक का इंतजाम किया।