हरदोई। शहर के नानकगंज के रज्जूपुरवा निवासी रेलवे में गैंगमैन लियाकत अली के बड़े बेटे आशिक को सऊदी हुकूमत ने पकड़ कर जेल में डाल दिया है। वह वहां उमरा करने के लिए गया था। इस्लाम में जिंदगी में एक पर हज करना फर्ज है लेकिन उमरा करना सुन्नत है। उमरा पर हज के दिनों को छोड़कर कभी भी जाया जा सकता है। इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक मानवाधिकार संरक्षण के पदाधिकारियों ने उसकी रिहाई के लिए ज्ञापन दिया।
उमरा पर जाने वालों को सऊदी हुकूमत 15 दिन का वीजा देती है। उमरा करने के लिए 25 से 30 हजार रुपये लगते हैं। इसीलिए बहुत से लोग वहां पर काम करने की नीयत से उमरा के वीजे पर चले जाते हैं। इसके बाद वीजा खत्म होने के बाद अगर वहां पकड़ लिए जाते हैं तो सऊदी हुकूमत उनको जेल में डाल देती है। वह दिसंबर 2015 को उमरा पर गया था। उमरा के दौरान वह सऊदी में अपने दोस्तों के पास चला गया। वहीं से उसे सऊदी पुलिस पकड़ ले गई। वहां पर उसके साथ कई और लोग भी थे। उसके वहां जेल में होने की जानकारी मिलते ही परिवारवाले परेशान हो गए।
इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक मानवाधिकार संरक्षण के पदाधिकारियों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी कुंज बिहारी अग्रवाल को सौंपा। ज्ञापन से सऊदी हुकूमत से बात कर उसकी रिहाई की मांग की गई थी। ताकि वह वहां से अपने वतन आ सके। ज्ञापन देनेवालों में राजीव सिंह, पिंटू सिंह, शहबाज हुसैन, आनंद शेखर सिंह, जितेंद्र गुप्ता, संजय सिंह, चंदन त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। उसकी पत्नी कुरैशी भी पति के जेल में होने की खबर से परेशान है। उसके चार साल का बेटा आसिफ, तीन साल का काशिफ और छह माह की बेटी इलमा है। उधर, अंजुमन इस्लामियां के मोहम्मद खालिद ने राष्ट्रपति को एक पत्र भेजकर भारतीय दूतावास से संपर्क कर उसकी रिहाई की मांग की।
वर्जन
सऊदी हुकूमत कई सालों से उमरा के लिए 15 दिन का वीजा देती है। उमरे के वीजे पर कुछ लोग वहां रुककर काम करने लगते हैं। यह गैरकानूनी है। इसलिए वीजा अवधि खत्म होने के बाद कोई वहां मिलता है तो पुलिस उसे पकड़ लेती है। वहां जेल में किसी तरह की परेशानी नहीं होती है। सऊदी हुकूमत खुद ही उसे वहां से इंडिया भेज देगी।
शारिक अलवी, मास्टर ट्रेनर, उत्तर प्रदेश हज कमेटी