हरदोई। शहर में मेडिकल कालेज की स्थापना भले ही हो गई हो, लेकिन करंट और आग से झुलसे मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। ऐसे अधिकांश मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। वजह यह कि मेडिकल कालेज में बर्न वार्ड ही नहीं है। दीपावली के आस पास एक कक्ष में औपचारिकता पूरी करने के लिए अस्थाई बर्न वार्ड बना दिया जाता है।
जिला अस्पताल परिसर में पीछे की ओर आठ बेड का बर्न वार्ड था। आवश्यकता के मुताबिक इस वार्ड में चार एसी भी लगे थे। मेडिकल कालेज का निर्माण जिला अस्पताल परिसर में ही शुरू हुआ तो बर्न वार्ड को तोड़ दिया गया। बर्न वार्ड टूट तो गया, लेकिन इसकी जगह कोई दूसरा बर्न वार्ड नहीं बनाया गया। दरअसल आग या करंट से झुलसे मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा होता है। इसके चलते ऐसे मरीजों के लिए विशेष वार्ड बनाया जाता है। इस वार्ड में मच्छरदानी से लेकर एसी तक की व्यवस्था रखी जाती है। इसके पीछे संक्रमण से बचाने के साथ साथ मक्खी और मच्छर से बचाने की प्राथमिकता भी बड़ी वजह है। पूरे मामले पर मेडिकल कालेज के प्राचार्य डाॅ. आर्यदेश दीपक कहते हैं कि आईपीडी का भवन हैंडओवर होते ही बर्न वार्ड बनवा दिया जाएगा। इसी परिसर में बर्न वार्ड की व्यवस्था रखी गई है।