हरदोई। मार्च के शुरू में ही तापमान 30 डिग्री के ऊपर चला गया है। जिले के अधिकतर कुएं पट चुके हैं। करीब दस फीसदी हैंडपंप खराब हैं। कोई बालू उगल रहा है तो कोई डेड पड़ा है। गर्मी में जल स्तर गिरने से दिक्कत और बढ़ेगी। पेयजल की दिक्कत का सामना करने के लिए कोई तैयारी नहीं की गई है।
गर्मी के मौसम में पेयजल की खपत ठंड केे मौसम की अपेक्षा दस से 15 गुना तक बढ़ जाती है। यात्री पानी की बोतल साथ लेकर चलते हैं या फिर दो रुपये पाउच से बीस रुपये लीटर तक की कीमत पर मिलने वाले ठंडे पानी से प्यास बुझाते हैं।
हैंडपंपों के आंकड़े विभाग के पास नहीं
वर्ष 1998 से 2015 तक सांसद निधि और विधायक निधि से कितने हैंडपंप जिले में लगाए गए हैं इसके आंकड़े प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं हैं। जल निगम के करीब 47 हजार हैंडपंप लगे हैं। इसके अलावा सांसद निधि/विधायक निधि से लगाए गए हैंडपंपों की सूचना नहीं है।
वैसे तो सभी हैंडपंपों के बारे सूचनाएं जल निगम को दी जानी चाहिए। क्यों कि रिबोर कार्य जल निगम को ही कराना पड़ता है मगर बाहरी जनपदों की एजेंसियों ने यहां काम करने के बाद भी हैंडपंपों के बारे में जलनिगम को सूचनाएं नहीं दी। जिससे जिले में कुल हैंडपंपों की संख्या का लेकर तस्वीर स्पष्ट नहीं है। नोडल एजेंसी के एक्सईएन एपी यादव कहते हैं कि जलनिगम के हैंडपंपों के अलावा अन्य के बारे में विभाग के पास सूचनाएं नहीं है। कितने हैंडपंप खराब हैं यह सर्वे के बाद ही पता चल सकेगा।
वर्जन
गर्मी के मौसम को लेकर सूखा एवं बाढ़ राहत की होने वाली बैठकों में कार्ययोजना बनेगी। खराब हैंडपंपों की ग्राम पंचायतों आदि से सूचनाएं आने बाद मरम्मत कराई जाएगी। - लक्ष्मी शंकर सिंह, अपर जिलाधिकारी