मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. आरके मिश्रा
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जिले में मलेरिया की स्थिति भयावह हो गई है। पिछले पंद्रह दिनों में सरकारी अस्पताल और मलेरिया विभाग की जांच में 50 से अधिक मलेरिया पाजिटिव मिल चुके हैं। सितंबर के पांच दिनों में 23 पाजिटिव रोगी मिल गए हैं। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक में मलेरिया से निपटने के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं की गई है। गांवों में फागिंग व छिड़काव भी नहीं कराया जा रहा है। नगरीय क्षेत्रों में भी एक दो दिन औपचारिकता पूरी कर फागिंग मशीनें खड़ी कर दी गई हैं।
शहरों से लेकर गांवों तक फैली गंदगी, जलभराव बीमारियां बढ़ा रहे हैं, इसके बावजूद अधिकारी केवल औपचारिकताएं ही पूरी कर रहे हैं। अगस्त तक एक भी गांव और शहर में फागिंग नहीं कराई गई। इससे मादा एनीफिलीज मच्छर की बाढ़ आ गई है। इससे मलेरिया रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल की पैथालॉजी में ब्लड की जांच कराने के लिए लंबी लाइन लग रही है। मंगलवार को रात करीब नौ बजे तक जांच की जाती रही। अगस्त में 120 मरीजों की जांच की गई, इसमें 40 मरीज मलेरिया पाजिटिव के निकले। सितंबर में पांच तारीख तक 23 लोग मलेरिया पाजिटिव मिल चुके हैं।
पिछले वर्ष पांच सितंबर तक जिला अस्पताल की पैथालॉजी में केवल एक रोगी मलेरिया पाजिटिव मिला था। मलेरिया विभाग की जांच में 21 अगस्त से पांच सितंबर तक 25 मलेरिया पाजिटिव मिल चुके हैं जबकि जनवरी 2016 से 20 अगस्त तक की जांच में 60 रोगी मिले थे। यानी मलेरिया विभाग को जनवरी से अब तक 85 लोग मलेरिया पाजिटिव मिल चुके हैं। इसके बावजूद न ही किसी गांव में फागिंग कराई जा रही है और न ही नालियों और जलभराव वाले स्थानों पर केरोसिन का छिड़काव कराया जा रहा है। मरीजों को किसी तरह की दवाएं भी नहीं बांटी जा रही हैं।