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अब पूरी होगी मक्का-मदीना के दीदार की हसरत

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पिहानी। कोरोना संक्रमण के चलते सऊदी अरब की ओर से पवित्र हज यात्रा पर लगाई गई रोक हटाए जाने से जायरीन-ए-हज में खुशी का माहौल है। लोगों ने आवेदन करना भी शुरू कर दिया है।
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इस्लाम के पांच बुनियादी और अहम रुक्न में नमाज, रोजा, जकात और तौहीद के साथ ही हज भी शामिल है। जकात और हज की इबादत केवल एक निश्चित हैसियत रखने वाले मुसलमानों के लिए ही फर्ज है। गत वर्ष पिहानी कस्बे से कई लोगों ने पवित्र हज यात्रा के लिए आवेदन किया था, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण सऊदी अरब ने इस बार हज यात्रा पर रोक लगा दी थी। जिससे तैयारियों में लगे हाजियों को खासी मायूसी हुई थी। हाल ही में सऊदी अरब की ओर से हज यात्रा शुरू किए जाने को अनुमति दी गई गई है। सात नवंबर से आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। (संवाद)
- पिहानी कस्बे के मोहल्ला खुरमुली निवासी मोहम्मद आरिफ ने बताया कि पिछले साल वह अपने अम्मी-अब्बू के साथ यह मुबारक सफर करना चाहते थे, लेकिन इस बार यात्रा के लिए उम्र की सीमा निर्धारित कर दिए जाने के कारण उन्हें अपने अम्मी अब्बू के बगैर ही जाना पड़ेगा। उन्हें खुशी है कि कम से कम अपनी आंखों से मक्का मदीना का दीदार करेंगे। अपनी अम्मी-अब्बू को भी हज की सआदत नसीब करने की दुआएं मांगेंगे।
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- पिहानी के मोहल्ला लोहानी निवासी हाफिज साजिद ने बताया कि कोरोना के कारण हज यात्रा पर रोक लग जाने के वह और हज जाने वाले अन्य लोगों में बेचैनी थी। पता नहीं था कि जिंदगी में यह मौका मिल पायेगा या नहीं। खुदा के शुक्रगुजार हैं कि उसने यह मौका दोबारा अता किया। उन्होंने कहा कि जमा होने वाली किस्त के बढ़ने का मलाल कम और हज को इजाजत मिलने की खुशी ज्यादा है।
- पिहानी के मुरीदखानी मोहल्ले के मोहम्मद अहमद ने बताया कि हज यात्रा को अनुमति मिलने से उन्हें बेहद खुशी मिली है। इस बार जमा होने वाली रकम 81 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी गई, जो कि गलत है। हज की तमन्ना आम लोगों को भी है। अधिकांश लोग लोग थोड़ा थोड़ा जमा कर हज के खर्चे की रकम जुटाते हैं। इसमें रियायत होनी चाहिए थी।
- मोहल्ला मुरीदखानी निवासी 57 वर्षीय चांद बीबी ने शुक्र जताया कि वह यात्रा के निर्धारित उम्र सीमा के भीतर हैं और हज पर जा पा रही हैं। कहा कि पिछले वर्ष रोक के कारण उन्हें बहुत मलाल था। बचपन से जिन मुकद्दस मुकामात को किताबों और कैलेंडर्स में देखा, उनको अपनी आंखों से देख पाना उनके लिए बेहद रोमांचक होगा। वह वहां जाकर भारत को कोरोना से मुक्ति दिलाने और मुल्क में अमन चैन के लिए खुदा से दुआएं मांगेंगी।
उम्र अधिक होने से मायूसी
पिहानी। ये पूछ के आका से ऐ हाजियों तुम आना, अहकर को शहे बतहा, कब आप बुलाएंगे। किसी की नात का यह शेर सत्तर वर्षीया कमरुन्निसा, 75 वर्षीय नजीर अतहर और 90 वर्षीय अनवरी की जुबान पर है। उन्होंने कहा कि हज के लिए इस बार अनुमित देते 18 से 65 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित कर दी गई है। आयु सीमा के चलते वह इससे वंचित हो गए हैं। इसको लेकर अभी तक मायूसी के शिकार हैं।
घरों में काम कर जोड़ा पैसा, अब अनुमति नहीं
पिहानी। ग्राम शाहपुर सैदान की 90 वर्षीय अनवरी गरीब हैं, लेकिन नेक खातून हैं। नमाज रोजे की पाबंद अनवरी, पति की मृत्यु के बाद एक अरसे से घरों में बर्तन आदि धुलने का काम करती हैं। उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से एक एक पाई जोड़ कर इतनी रकम इकट्ठा की है कि हज पर जा सकें। पिछले साथ आवेदन भी कर दिया, लेकिन रोक के चलते उनका जाना नहीं हो सका। हज यात्रा फिर से शुरू हो रही है, लेकिन उम्र अधिक होने के कारण वह हज पर नहीं जा पा रही हैं। हज की हसरत लिए अनवरी दिन रात अल्लाह से गुनाहों पर माफी के साथ एक बार अपने दरबार में बुला लेने की दुआएं मांग रही हैं।
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