कैंसर रोगों का एक वर्ग है, जो अनियंत्रित वृद्धि,
रोग आक्रमण और लसिका या रक्त से शरीर के अन्य भागों में तेजी से फैल जाता
है। यह रोग विशेष प्रकार की स्थिति व अवस्था पर निर्भर करता है। शल्य
चिकित्सा, कीमोथेरेपी एवं रेडियोथेरेपी द्वारा इसका इलाज संभव है, पर इलाज
में देरी व गलत दिशा में इलाज भी घातक है।
डॉक्टर सीपी कटियार ने कहा
कि कैंसर आम तौर पर शरीर में कहीं भी किसी भी अंग में हो सकता है। कई रोग
आपस में मिलकर एक गांठ बना लेते हैं, जो काफी जटिल हो जाती है और यह
अनियंत्रित वृद्धि करता है। रक्त या लसिका में पूरे शरीर में फैल जाने की
क्षमता रखता है।
कैंसर का इलाज इसलिए कठिन माना जाता है कि इसकी वृद्धि पर
कोई नियंत्रण नहीं है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि कैंसर का इलाज नहीं है।
कैंसर का इलाज सही समय पर कराने से परिणाम अनुकूल रहते हैं। डाक्टर ने
बताया कि कैंसर के कारण कई हो सकते हैं।
इनमें उत्परिवर्तन यानी रासायनिक
कर्सिनोजन, आयनीकरण करने वाले विकिरण, वायरस या जीवाणु का संक्रमण,
हार्मोंस असंतुलन, प्रतिरक्षा तंत्र की क्रियाप्रणाली में खराबी तो कारण
होते ही है। इसके साथ आनुवंशिकता भी इसका प्रमुख कारण हो सकता है। यदि
रोग किसी को हो चुका है तो किसी और के होने की संभावनाएं रहती हैं।
उधर,
कैंसर रोगियों का दुख दर्द बांटने को अमर उजाला फाउंडेशन भक्ति वेदांता
मुंबई के साथ जिले में ही नि:शुल्क कैंसर चिकित्सीय परीक्षण शिविर लेकर आ
रहा है। जिसका आयोजन बाला जी हास्पिटल अस्पताल रोड के सहयोग से बाला जी
कैंपस में ही नौ फरवरी को किया जाएगा, जिसमें मुंबई के वेदांता हास्पिटल के
चिकित्सक जिले में आएंगे।
वेदांता के ओकोलाजिस्ट डा. विष्णु अग्रवाल के
साथ कैंसर विशेषज्ञ डा. विष्णु मोहन, डा. अमोल व सहायक नेत्रपात्र मौजूद
रहेंगे। जिले के पीड़ितों का परीक्षण करने के साथ उनको परामर्श भी देंगे।
उधर, डॉक्टर नेत्रपाल ने बताया कि कैंसर को कोशिका के प्रकार के आधार पर
वर्गीकृत किया जाता है।
जो गांठ से समानता रखती है, इसलिए ऊतक को गांठ से
उत्पन्न माना जा सकता है। उन्होंने बताया कि कार्सिनोमा कोशिकाएं सबसे
सामान्य कैंसरों को उत्पन्न करता है। उदाहरण के रूप में स्तन, प्रोस्टेट,
फेफड़े व बड़ी आंत का कैंसर शामिल है। संयोजी ऊतक या मध्योतक कोशिकाओं से
दुर्दम गांठ पैदा होती हैं।
उनका कहना है कि जिसे रक्त कैंसर या लिंफोमा का
नाम दिया जाता है। वह हिमेटोपोयटिक कोशिकाओं से पैदा होता है। जनन
कोशिकाओं से पैदा गांठ, वयस्कों में अकसर शुक्र ग्रंथि व अंडाशय में पाई
जाती है।
बताया कि कैंसर के यदि लक्षणों के बारे में बात करें तो असामान्य
गांठ व सूजन, रक्तस्राव, पीड़ा, आसपास के ऊतकों में संपीड़न से पीलिया
जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं। आंखों व त्वचा का पीलापन भी प्रमुख लक्षण
माना जाता है।