आने वाले समय में जिले का एक चौराहा ग्राम नीर के ले.
कर्नल हर्ष उदय सिंह गौर के नाम से भी जाना जाएगा। इसको लेकर रक्षा
मंत्रालय से चले पत्र को डीएम से लेकर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी तक ने न
सिर्फ संज्ञान में लिया, बल्कि डीएम के निर्देश के बाद चौराहे को भी
चिह्नित कर लिया गया है।
अस्पताल चौराहे के पास शहीद की प्रतिमा लगाने
को भूमि देने की पूरी तैयारी है। ज्ञात हो कि 20 साल पहले जम्मू-कश्मीर के
बारामुल्ला जिले के बाजीपुरा में 15 आतंकियों को मारने के बाद वीर गति को
प्राप्त करने वाले अशोक चक्र से सम्मानित ले. कर्नल हर्ष उदय सिंह गौर के
सम्मान में नवंबर में उनके पैतृक गांव में सम्मान समारोह हुआ था।
सैन्य
टुकड़ी की अगुवाई कर रहे नायब सूबेदार मनोज सिंह द्वारा बताया गया था कि
गांव में ही उनके नाम से एक पार्क का निर्माण होगा, जिसमें एक चबूतरा होगा
और उस पर संगमरमर की उनकी प्रतिमा को स्थापित करवाया जाएगा। इसको लेकर पूरा
प्रस्ताव तैयार है।
इसके साथ ही जिले के दो चौराहों का प्रस्ताव बनाकर
सैनिक कल्याण अधिकारी को डीएम को देना है। इसके बाद उनके द्वारा उस
प्रस्ताव पर अनुमति देकर अग्रिम निर्देश जारी किए जाएंगे। जिला सैनिक
कल्याण अधिकारी कर्नल लक्ष्मीकांत तिवारी ने बताया कि उसी के अनुपालन में
डीएम ने पालिका को लिखा जिस पर अभी पालिका द्वारा सोल्जर बोर्ड से कुछ दूर
अस्पताल चौराहे पर टंकी के नजदीक शहीद की प्रतिमा लगाने को सहमति दी है।
उधर, ले. कर्नल हर्ष उदय सिंह गौड़ का जन्म जिले के ग्राम नीर में एक जुलाई
1953 को हुआ था। 19 जुलाई 73 को उन्होंने बिहार रेजिमेंट के दसवीं बटालियन
में कमीशन प्राप्त किया था। वह एक तेज तर्रार, साहसी और निर्भीक अधिकारी
थे। जिन्होंने अपनी पूरी सैन्य सेवा के दौरान सैनिक परंपराओं का आदर्श
प्रस्तुत किया।
29 नवंबर 94 को ले. कर्नल हर्ष उदय गौर ने जम्मू कश्मीर
के बारामुल्ला जिले के बाजीपुरा गांव में इस कार्रवाई के दौरान वीरगति से
पहले 15 आतंकवादियों को मार गिराया था और आतंकवादियों से लड़ते हुए वीर गति
को प्राप्त हुए थे। उनके इस कारनामे को राष्ट्र के शांतिकाल के सर्वोच्च
वीरता पदक अशोक चक्र से मरणोपरांत सम्मानित किया गया था।