हरदोई। लेखपालों की मनमानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नौकरी वाले परिवार की आमदनी कम और खेती-किसानी व मजदूरी वर्ग के परिवार की आमदनी को अधिक बता दिया।
इतना ही नहीं शादीशुदा महिला का भी मायके से ही निवास प्रमाण पत्र जारी करा दिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद पर चयनित अभ्यर्थियों में से 21 के आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र निरस्त किए गए हैं।
महिला बाल विकास और सेवा पुष्टाहार विभाग में आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकर्ता पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई। कार्यकर्ता पद पर चयन के लिए शैक्षिक योग्यता के साथ ही आय भी एक मापदंड में शामिल थी। कम आय वाले अभ्यर्थी को वरीयता मिलने के उद्देश्य से आवेदकों और उनके परिवारों ने लेखपालों से मिलकर प्रमाण पत्र हासिल कर लिए। लेखपालों ने भी प्रमाण पत्र बनाए जाने की आख्या में मनमानी की।
इसका खुलासा तब हुआ जब, कार्यकर्ता पद पर चयन की सूची जारी हुई। खेती-किसानी और मजदूर वर्ग के परिवार के आवेदन के स्थान पर नौकरी करने और शादीशुदा महिलाओं का मायके में चयन हुआ। शिकायतें आनी शुरू हुईं। 88 केंद्रों पर चयन को लेकर शिकायतें आईं। डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने शिकायतों की जांच कराई। जांच में आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र में गड़बड़ी की पुष्टि हुई। गलत आख्या वाले 21 आय, जाति और निवास प्रमाण निरस्त किए गए। इसी के साथ उन प्रमाण पत्रों के आधार पर चयनित हुए आवेदकों का चयन भी निरस्त करा दिया गया है।
केस एक
रश्मिका पुत्री अनूप कुमार, मूल निवासी फत्तेपुरगयंद तहसील शाहाबाद की हैं, जबकि लेखपाल ने रश्मिका का निवास प्रमाण पत्र परियल का जारी करा दिया था।
केस दो
नीतू शर्मा पुत्री रामखेलावन और नीलम पुत्री कल्लू निवासी गुलरिहा तहसील सदर की निवासी हैं। लेखपाल ने दोनों के आय प्रमाण पत्र गरीबी की रेखा के नीचे बनवा दिए, जबकि तलाकशुदा महिला रोली शर्मा का आय प्रमाण पत्र 48,000 रुपये का बना दिया।
केस तीन
श्वेता सिंह पत्नी अपार सिंह निवासी चौधरियापुर तहसील बिलग्राम की निवासी हैं। इनकी शादी अपार सिंह से तीन साल पहले हुई थी। श्वेता ने अपना आय और निवास प्रमाण पत्र लेखपाल से मिलकर मायके औरेनी गांव तहसील सवायजपुर का बनवा लिया। पूनम देवी ने शिकायत की। शिकायत पर जांच में गलत प्रमाण पत्रों की पुष्टि हुई।
केस चार
प्रियांशी पत्नी शरद सिंह निवासी नगलाजुला जनपद मैनपुरी ने अपने मायके बकौरा तहसील शाहाबाद से प्रियांशी पुत्री मनीष कुमार के नाम से लेखपाल ने निवास प्रमाण पत्र बनाए जाने की आख्या दे दी। निवास प्रमाण पत्र बन भी गया। जांच में प्रमाण पत्र गलत पाया गया।