ग्राम प्रधान की पहल से बदली बांसा पंचायत की तस्वीर
ग्राम प्रधान की पहल और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने बांसा ग्राम पंचायत की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। अमर उजाला की टीम जब बांसा गांव पहुंची तो ग्राम प्रधान सम्पूर्णानन्द ने पंचायत में हुए विकास कार्यों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि एक अवसर पर मुख्यमंत्री ने उनसे बातचीत की थी और बेहतर विकास कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उसी प्रेरणा को आधार बनाकर उन्होंने ग्राम पंचायत में कई जनहित के कार्य कराए। उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री की ओर से 35 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई।
ग्राम पंचायत में जन सुविधा केंद्र, मॉडल शॉप, तेरहवीं तीर्थ स्थल, ओपन जिम और बांसा कम्युनिटी लैब जैसी कई सुविधाएं विकसित की गई हैं। इन विकास कार्यों से गांव के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं और पंचायत एक मॉडल गांव के रूप में पहचान बना रही है। ग्राम प्रधान ने बताया कि गांव में हुए विकास कार्यों की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं, जिससे पूरे गांव के लोगों का उत्साह और बढ़ा है।
योगी सरकार ने 'अमृत सरोवर' से चमकाया
योगी सरकार की पहल पर हरदोई में अमृत सरोवर योजना के तहत हुए कार्यों ने कई गांवों की तस्वीर बदल दी है। तालाबों के जीर्णोद्धार और नए अमृत सरोवरों के निर्माण से जल संरक्षण के साथ साथ गांवों की स्वच्छता और सौंदर्य में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
अमर उजाला की टीम ने हरदोई में स्थानीय लोगों से बात की। स्थानीय निवासी राम भजन कश्यप ने बताया कि गांव में तालाबों का पुनर्जीवन और पानी की टंकी जैसी सुविधाएं बनने से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब गांव का माहौल पहले की तुलना में काफी बेहतर और आकर्षक नजर आता है।
वहीं, स्थानीय निवासी आशीष सिंह सोलंकी ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद विकास कार्यों के लिए धन की कमी नहीं रही। पहले जिस स्थान पर गंदगी और उपेक्षा का माहौल था, वहां आज अमृत सरोवर के निर्माण से स्वच्छता और सुंदरता देखने लायक है। इससे गांव की पहचान भी बदली है। उपायुक्त श्रम रोजगार रवि प्रकाश ने बताया कि हरदोई की प्रत्येक ग्राम पंचायत में अमृत सरोवर विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह कार्य मनरेगा योजना के तहत कराया जा रहा है। इससे जल संचयन क्षमता बढ़ी है, भूजल संरक्षण को मजबूती मिली है और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला है।
ओडीओपी से 'हथकरघा' को मिला बढ़ावा
ओडीओपी योजना के तहत हरदोई के पारंपरिक हथकरघा उद्योग को नई पहचान और मजबूती मिली है। इस योजना से जुड़े उद्यमियों और कारीगरों का कहना है कि आर्थिक सहायता मिलने के बाद उनका कारोबार बढ़ा है और वर्षों से ठप पड़ रहे करघे भी दोबारा चलने लगे हैं।
अमर उजाला की टीम ने हथकरघा उद्योग से जुड़े लोगों से बातचीत की। कारखाना संचालक महशर हुसैन ने बताया कि ओडीओपी योजना उनके लिए काफी लाभकारी साबित हुई। पहले पूंजी की कमी के कारण कारोबार का विस्तार नहीं हो पा रहा था, लेकिन योजना के तहत 25 लाख रुपये का ऋण मिलने के बाद उन्होंने अपने काम को तेजी से बढ़ाया। उन्होंने बताया कि पहले उनके यहां केवल दो करघों पर काम होता था, जबकि अब 20 करघे संचालित हो रहे हैं। इससे उत्पादन बढ़ा है और कई लोगों को रोजगार भी मिला है।
वहीं, हथकरघा कारीगर रशीद अहमद अंसारी ने बताया कि योजना के तहत ऋण मिलने से काम में तेजी आई है और पहले की तुलना में स्थिति बेहतर हुई है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब करघे बंद होने की स्थिति में पहुंच गए थे, लेकिन ओडीओपी योजना के बाद उद्योग को नया जीवन मिला और करघे फिर से चलने लगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदेश के बाहर और बड़े बाजारों से नियमित ऑर्डर मिलने लगें, तो हथकरघा उद्योग को और अधिक गति मिलेगी। उनका मानना है कि बाजार का विस्तार होने से स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ेगी और इस पारंपरिक उद्योग को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।