हरदोई। शहर के नुमाइश चौराहा सहित कुछ हिस्से में शनिवार की देर रात अचानक बिजली बंद हो गई। गर्मी व उमस से बेहाल लोग घरों के बाहर निकल आए। उपभोक्ता से लेकर विभाग के जेई तक लाइनमैन को मोबाइल फोन मिलाते रहे लेकिन फोन नहीं उठा। जेई ने किसी तरह से लाइनमैन तक जानकारी पहुंचाई इसके सुबह तीन बजे बिजली आई और कुछ देर बाद दोबारा चली गई। इस दौरान बिजली विभाग के कर्मचारी चुप्पी साधे रहे। लाइनमैन ने बताया कि बच्चों ने मोबाइल साइलेंट पर लगा दिया था।
बिजली व्यवस्था में सुधार और आपूर्ति को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद खराब है। कागजों में बिजली आपूर्ति धड़ाधड़ हो रही है, लेकिन उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही बिजली गुल भी हो जा रही है। शनिवार रात लगभग साढ़े दस बजे शहर के मोहल्ला सुभाष नगर (असेंबली ऑफ गॉड स्कूल वाली गली) में एरियल बंच कंडक्टर जलने लगता है। आस पास मौजूद लोग पानी डालकर आग बुझा देते हैं। जानकारी पर अलीम नाम का लाइनमैन मौके पर पहुंचा। जले हुए तारों की फोटो खींचता है और वापस चला जाता है।
मोहल्ले के उपभोक्ताओं को लग रहा है कि अभी कुछ देर में कर्मचारी मरम्मत का काम शुरू करेंगे, धीरे धीरे साढ़े 11, साढ़े 12 और पौने एक बज जाता है। धीरज खो चुके उपभोक्ता पावर हाउस पहुंचते हैं तो पता चलता है कि यहां वह लाइनमैन है ही नहीं। हिमांशू नाम का लाइनमैन मिलता है और खुद को बेबस बताता है। अलीम को उपभोक्ताओं से लेकर विभागीय कर्मचारी तक फोन कर रहे हैं, लेकिन फोन नहीं उठ रहा।
मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचने का एहसास क्षेत्रीय अवर अभियंता को हुआ तो मरम्मत के लिए रात एक बजे कर्मचारी भेजे गए। जो कर्मचारी गए उन्हें काम नहीं आता था और फिर अलीम मौके पर पहुंचे। बताया कि बच्चों ने फोन साइलेंट मोड पर लगा दिया था, लेकिन विभागीय कर्मचारी बताते हैं कि फाल्ट पता चलने के बाद मोबाइल साइलेंट पर लगाकर अलीम सो गया। जेई के कहने पर मौके पर गया और सुबह तीन बजे मरम्मत के बाद आपूर्ति शुरू हो पाई।
घर में रखा शव, गर्मी में बेहाल रहे रिश्तेदार
सिटी पावर हाउस में परेशान होकर पहुंचे लोगों में एक युवक भी शामिल था। बिल्कुल बदहवास और आंखों से आंसू बहते रहे। युवक ने बताया कि सुभाष नगर में रहते हैं। बाबा राम सिंह (76)का शनिवार शाम अचानक निधन हो गया। बिजली चली गई मेहमान आ गए, इनवर्टर जवाब दे गया। अब तो शव का चेहरा तक देखने के लिए मोबाइल से रोशनी करनी पड़ रही है। लाइट चालू कराने की गुहार सबसे लगाता युवक वाकई दर्द नहीं संभाल पा रहा था।