हरदोई। लखीमपुर खीरी के वन क्षेत्रों से जिले की सरहद में भटककर आया तेंदुआ पिछले कुछ दिनों से टड़ियावां क्षेत्र के गुरसंडा गांव में गन्ने के खेत में अपनी आरामगाह बनाए था। वन अधिकारियों ने अपनी कांबिंग के दौरान इस खेत में जब उसके कई पंजों के निशान देखे तो उन्होंने इस तथ्य की पुष्टि की। डीएफओ ने इस क्षेत्र की बारीकी से काबिंग करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। कुल मिलाकर 46 दिन बाद भी तेंदुए की दहशत जिले में बरकरार है।
तेंदुए ने बेहटागोकुल के पिपरीपुर में पांच लोगों को घायल कर सबसे पहले अपने होने का अहसास कराया। उसके बाद शाहाबाद का गढ़ीचांद, शहर से एक कि लोमीटर दूर अनंगबेहटा और उसके बाद अनंगबेहटा के पास ग्राम चक, फिर सांडी का भीखपुर और इसके बाद हरपालपुर का परचौली, अनंगबेहटा के पास ही पोहकरपुरवा में अपने पंजों के निशान छोड़कर फैलाई गई दहशत अभी कम भी न हो पाई थी कि एक बार फिर से वह टड़ियावां के अमरावां, थोकखाला, भैंसरी में पहुंच गया और चार बकरियों को मारकर भाग निकला।
जिसके बाद गुरुवार को टड़ियावां क्षेत्र में ही तेंदुए ने ग्राम अमरावां में एक बकरी का शिकार कर लिया। गांव के गिल्लू की बकरी को उसने अपना निवाला बनाकर गांव में अपनी मौजूदगी बता दी। वहीं भैंसरी के सुरेश धोबी के बकरे पर भी हमला किया। इसके बाद वन विभाग ने इस क्षेत्र में अपनी कांबिंग बढ़ा दी। शनिवार सुबह अमरावां से ही तीन किलोमीटर दूर पूरब की ओर बसे गांव गुरसंडा में वन विभाग को तेंदुआ तो हाथ नहीं लगा लेकिन गन्ने के खेत में उसके कई पंजों के निशान मिले।
जिसके बाद वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उसने यहां काफी समय बिताया है और चहलकदमी की है। डीएफओ अतुल अस्थाना ने बताया कि इसी क्षेत्र में तेंदुआ होने की प्रबल संभावनाएं मिल रहीं है। कांबिंग और बढ़ा दी गई है। दूसरे रेंजों के कर्मी भी बुलाए गए हैं, जो लगातार काबिंग में जुटे हैं।